बहुत से लोग हैं जिनकी शिकायत होती है कि कुछ भी करो लेकिन शुगर लेवल कम नहीं होता है, लेकिन लखनऊ में ही कुछ लोग ऐसे हैं जिन्होंने जीवनशैली और खानपान में सुधार करके मधुमेह को काबू में कर लिया है। कुछ लोगों का तो यह भी कहना है कि मधुमेह से परहेज के चलते उनकी दूसरी बीमारियां भी दूर हो गईं। अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में मस्त करने वाले इन लोगों ने आखिर कैसे किया मधुमेह पर काबू यह जानने के लिए अमर उजाला ने उनसे फिट रहने का राज जाना। पेश है बातचीत के प्रमुख अंश:
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प्रतीकात्मक तस्वीर
जानिए क्या होता है मधुमेह
जब हमारे शरीर के पैंक्रियाज में इंसुलिन का पहुंचना कम हो जाता है तो खून में ग्लूकोज का स्तर बढ़ जाता है। इसे मधुमेह कहा जाता है। इंसुलिन एक हार्मोन है जो कि पाचक ग्रंथि से बनता है। यह शरीर के अंदर भोजन को एनर्जी में बदलता है और शुगर की मात्रा को कंट्रोल करता है। मधुमेह होने पर शरीर को भोजन से एनर्जी बनाने में कठिनाई होती है। इस स्थिति में ग्लूकोज का बढ़ा हुआ स्तर शरीर के विभिन्न अंगों को नुकसान पहुंचाना शुरू कर देता है। यह वंशानुगत और जीवनशैली बिगड़ी होने के कारण होता है।
ऐसे समझिए ब्लड शुगर लेबल
सामान्य ब्लड शुगर 80 से 110
लो ब्लड शुगर 70 से नीचे
प्री डायबेटिक 100 से 126
डायबेटिक 126 या इससे
अधिक नोट : शुगर लेवल मिग्रा/प्रति डीएल
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प्रतीकात्मक तस्वीर
पहचानें लक्षण
ज्यादा प्यास लगना
बार-बार पेशाब आना
रोशनी कम होना
घाव सूखने में समय लगना
हाथों, पैरों में खुजली
बार-बार फुंसी निकलना
चक्कर आना, चिड़िचिड़ापन होना, कमजोरी लगना
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पवन सिंह
- फोटो : अमर उजाला
छह किमी रोज चलाता हूं साइकिल
करीब पांच साल पहले शुगर लेवल अधिक होने का पता चला। डरा नहीं, इस पर काबू पाने की ठानी। डॉक्टर की सलाह पर साइकिल चलाना शुरू किया। पहले 20 मिनट चलाते थे और अब 30 मिनट। सर्दी, गर्मी, बारिश हर मौसम में। पांच किलोमीटर टहलते हैं। गेहूं, जौ, चना मिश्रित आटे की रोटी खाते हैं। एकदम फिट हैं। बल्कि यह कहेंगे कि शुगर की वजह से शारीरिक श्रम बढ़ा, जिससे दूसरी बीमारियां भी दूर हो गई हैं। नियमित तौर पर ऑफिस जाता हूं। - पवन सिंह, एक निजी कंपनी में कार्यरत
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आशीष कुमार त्रिपाठी
- फोटो : अमर उजाला
सब खाता हूं लेकिन थोड़ा-थोड़ा
करीब पांच साल से शुगर लेवल 150 के आसपास पहुंच गया। डॉक्टर की सलाह पर पैदल चलना शुरू किया। सुबह 45 मिनट तेज गति से चलता हूं। दो माह के बाद शुगर लेवल नियंत्रित हो गया। सभी चीजें खाता हूं, लेकिन थोड़ा-थोड़ा। पैदल चलना बंद नहीं किया है। जिस दिन कोई मीठी चीज खा लेता हूं, उस दिन एक घंटे पैदल चलता हूं। घर में सामान्य खाना खाता हूं। शादी समारोह में अगर तेल-घी व मीठी चीजें खा लेता हूं तो अगले दिन उसे काबू करने का जतन करता हूं। - आशीष कुमार त्रिपाठी, एडवोकेट हाईकोर्ट
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आशा सिंह
- फोटो : अमर उजाला
सुबह की सैर और जीभ पर काबू
करीब सात साल पहले शुुगर लेवल 200 से अधिक हो गया था। इसे कम करने का फैसला लिया। सुबह करीब एक घंटे सैर करती हूं। इसके बाद योग। जीभ पर काबू रखती हूं। बाहरी चीजें कम से कम खाती हूं। सुबह जमकर नाश्ता करती हूं और रात को हल्का खाती हूं। इसकी वजह से शुगर लेवल 130 के आसपास रहने लगा है। नियमित सैर करने से मैं स्फूर्ति महसूस होती है। शुगर को लेकर डरने की जरूरत नहीं है। - आशा सिंह, गृहणी निवासी कानपुर रोड
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गणेश शंकर
- फोटो : अमर उजाला
चावल, चीनी, मैदा से करता हूं परहेज
मधुमेह को लेकर डरने की जरूरत नहीं है। सुबह-शाम हरी साग-सब्जी खाएं, चोकर वाले आटे की रोटी का सेवन करें। चावल, चीनी, चाय, मैदा से परहेज करें। सुबह न टहल पाएं तो शाम को टहलें। करीब 40 से 45 मिनट टहल कर मधुमेह को भय को खत्म किया जा सकता है। पहले डायबिटीज की दवा लेनी पड़ती थीं। जब से टहलना शुरू किया और खानपान पर नियंत्रण किया, शुगर लेवल भी नियंत्रित हो गया है। - गणेश शंकर पंवार, समाजसेवी, निवासी शिवाजी मार्ग।
विशेषज्ञ की सलाह
तीन बार भोजन करें और तीन बार नाश्ता
शुगर पर नियंत्रण का मूल मंत्र है दिनभर में तीन बार भरपेट खाना और तीन बार सिर्फ हल्का नाश्ता। इससे पेट खाली नहीं रहेगा। शाम को हल्का भोजन करें। खाने के दो से तीन घंटे बाद सोएं। इससे इंसुलिन बनने की प्रक्रिया निर्धारित मात्रा में रहेगी। मोटे अनाज की रोटी, पत्तेदार सब्जी, फल और सलाद का भरपूर प्रयोग करें। वजन अधिक है तो उसे कम करें। सुबह शाम सैर करें और साइकिल चलाएं। - डॉ. निखिल गुप्ता, लोहिया संस्थान