यूपी के सीएम आदित्यनाथ का कहना है कि चुने हुए जनप्रतिनिधियों को एक ही मंच पर बैठाना एक तराजू में मेढ़क तौलने जैसी बात है। वो बुधवार को लखनऊ के विधानभवन के तिलक हॉल में ‘उत्तर प्रदेश विधानसभा के नवनिर्वाचित सदस्यों के लिए प्रबोधन कार्यक्रम’ में पार्टी विधायकों को सम्बोधित कर रहे थे।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अगर साल में 90 दिन विधानसभा की कार्यवाही चली तो थानों और तहसीलों में होने वाली गड़बड़ियां खत्म हो जाएंगी। सरकारी मुलाजिमों को लग जाएगा कि अगर सही नहीं चले तो यह मुद्दा विधानसभा में उठ सकता है।
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उन्होंने कहा कि जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने के लिए समयबद्धता बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि 17वीं विधानसभा कीर्तिमान स्थापित करेगी। हमारे प्रदेश पर प्रकृति की असीम कृपा है, पर हमने उसका इस्तेमाल नहीं किया।
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मुख्यमंत्री ने कहा, अगर विधानसभा के अंदर विधायकों का आचरण लोकतंत्र के अनुरूप रहा तो प्रदेश की तकदीर बदलनी तय है।
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विधानसभा सदस्यों को अपना आचरण लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप रखने की नसीहत देते हुए योगी ने कहा कि उनकी सरकार प्रतिशोध की भावना से कोई काम नहीं करेगी।
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मुख्यमंत्री बोले, किसी के साथ अन्याय नहीं होगा, न ही किसी को कानून हाथ में लेने की इजाजत होगी। जाति, लिंग या मजहब के आधार पर भेदभाव का तो सवाल ही पैदा नहीं होगा।
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सीएम ने कहा, आज विधायिका के सामने अपनी विश्वसनीयता बनाए रखने का संकट खड़ा है।
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योगी ने कहा कि सदन एक ऐसा मंच है, जहां आपकी कही हुई बातें आने वाली पीढ़ियों का मार्गदर्शन करती रहेंगी। सदन के अंदर नियमों के दायरे में रहकर बात रखना और धैर्य न खोना यह किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है।
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सीएम ने संसद के अनुभव रखते हुए कहा कि नियम-कायदों के दायरे में रहकर अपनी बात रखना ज्यादा प्रभावी होता है। क्षेत्र में कोई विपदा आने पर सबसे पहले विधायक मौके पर पहुंचते हैं, इसके बावजूद उन्हें जवाबदेह नहीं माना जाता।
योगी ने कहा, मैं चाहता हूं कि संसद की तरह ही विधानसभा की कार्यवाही भी दिन-रात चले। विधानसभा अध्यक्ष से अनुरोध करूंगा कि इसकी अनुमति दें और सदस्यों के भोजन और जलपान की व्यवस्था भी करें।