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घाटों पर बही आस्था, परंपरा और विश्वास की त्रिवेणी, देखें तस्वीरें...

Fri, 27 Oct 2017 01:07 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ
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छठ
आसमान के धुंधलके में उगते सूर्यदेव और हाथों में सुपली लेकर उनसे मंगलकामना की अरज लगाती व्रती महिलाओं का सैलाब। आस्था, परंपरा और उत्सव की अद्भुत त्रिवेणी का ये नजारा शुक्रवार सुबह को आदित्योपासना के महापर्व डाला छठ पर गोमती के तमाम घाटों पर देखने को मिला।
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छठ पर्व
गुरुवार शाम से ही घाटों पर व्रती महिलाएं अस्ताचल सूर्य को पहला अर्घ्य देने जुटी थी। शाम 5 बजते-बजते सुशोभिताओं की पूजा कर गोमा में कमर भर तक पानी में पहुंची महिलाओं ने सूरजा देवता को अर्घ्य देने का सिलसिला शुक्रवार सुबह तक उगते सूर्य को अर्घ्य देने तक जारी रहा। 
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छठ
महापर्व का मुख्य आयोजन लक्ष्मण मेला घाट पर हुआ, जहां सांस्कृतिक मंच से गूंजते छठ के परंपरागत गीत ‘कांचहि बांस के बहंगिया बहंगी लचकत जाई.., आपन पूजवा लिहीं ये छठी मइया की गवनई और सुगंधियों ने पूरे घाट को सराबोर किया।

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छठ पर्व
 शुक्रवार सुबह उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर व्रती महिलाओं ने चार दिवसीय अनुष्ठान-व्रत का पारण किया।
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छठ
इसके अलावा कुड़ियाघाट, पक्का पुल घाट, डालीगंज पुल, खाटू श्याम मंदिर घाट, खदरा, गोमतीनगर, आशियाना, कृष्णानगर, तेलीबाग, नीलमथा समेत तमाम घाटों के अलावा लोगों ने अस्थाई इंतजाम कर सूर्यदेव को अर्घ्य दिए।
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छठ
अखिल भारतीय भोजपुरी समाज की ओर से सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया, जिसमें भोजपुरी लोकगीतों की बयार बही। देर रात तक संजू बघेल, रंजना मिश्रा ने गीतों से समां बांधा। इस मौके पर समाजसेवियों का सम्मान भी हुआ।
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छठ
हाईमास्ट की दूधिया रोशनी संग दीपों की झिलमिलाहट ने शहर के तमाम घाट चमक उठे। चार बजे के आसपास से जुटी तमाम महिलाओं ने छठ माई की गवनई के बीच परंपरागत रूप से पूजा शुरू की। तुलसी गछिया भुइया लोटे डाल, दउरा भरहा होइहै कवनराम बहंगी घाटे पहुंचाई.., पूजे चौखंड के पोखरवा जलवा उमड़त जाय..., सुना महादेव... जैसे छठी माई के गीतों के बीच महिलाओं ने सुशोभिता को साफ कर गन्ने से घेर कर दीये जलाए। स्थायी व अस्थायी करीब 800 से अधिक छोटी-बड़ी सुशोभिताओं की महिलाओं ने घेरे बनाकर विधिवत पूजा की। 

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छठ पर्व
शाम 4:30 बजेत-बजते लगभग पूरा घाट अर्घ्य देने वाली व्रती महिलाओं से खचाखच भर गया। बैंड बाजों आतिशबाजी के बीच व्रती महिलाओं ने घाटों पर आधे घंटे से ज्यादा समय तक कमर भर पानी में खड़े होकर पुत्र प्राप्ति, पति की दीर्घायु की मंगलकामना के साथ डूबते सूर्य को पहला अर्घ्य दिया।
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छठ
कुड़िया घाट, संझिया घाट पर पूजन अर्घ्य के अलावा कई घाटों पर पूजन हुआ। खदरा में शिव घाट के सामने हनुमान मंदिर के पास, महानगर, मवैया समेत रेलवे कॉलोनियों में भी पूजा की गई। 
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