बन्ना-बन्नी या ढोलक नहीं, अब डीजे वाले बाबू
वेडिंग प्लानर हर्षिता विजय कहती हैं कि बन्ना-बन्नी या ढोलक तो हम लोगों ने न देखा न सुना। एक समय था कि ढोलक की पूजा लेडीज संगीत से पहले होती थी। बन्ना-बन्नी की शुरुआत देवी गीत और गणेश वंदना से होती थी। आज भी ऐसा होता है, लेकिन परंपराओं का निर्वहन मानकर कर लिया जाता है। शादियों का उत्साह तो ढोल और डीजे की धुन पर ही दिखता है। इसी तरह अब दुल्हन शरमाते, सकुचाते हुए एंट्री नहीं करती, बल्कि नाचते-गाते जयमाल के स्टेज तक पहुंचती है।