फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बच्चों की बोर्ड परीक्षा ने बदला मम्मियों का भी रूटीन, टीचर्स ने पैरेंट्स को दिए ये टिप्स

Thu, 23 Jan 2020 02:19 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
विज्ञापन
1 of 6
बोर्ड एग्जाम ने मम्मियों का रूटीन बदला - फोटो : अमर उजाला
बोर्ड परीक्षा के लिए सिर्फ परीक्षार्थी ही कड़ी मेहनत करते हैं। यदि आप भी कुछ ऐसा ही सोचते हैं तो अपनी सोच को बदल डालिए, क्योंकि बच्चों के साथ-साथ मम्मियां भी कठिन दिनचर्या से गुजरती हैं। एक तरफ रोजमर्रा के काम तो दूसरी तरफ बच्चों की पढ़ाई, उनकी सेहत का ध्यान रखते हुए परीक्षा की तैयारी कराना। इस दौरान वे अपने सारे शौक को स्थगित कर देती हैं। हमने बात की कुछ मांओं से तो पता चला कि उन्होंने सोशल मीडिया, सोशल लाइफ से कुछ समय के लिए दूरी बना ली है। सारी सहेलियों को कहा दिया है कि अब बच्चों के एग्जाम बाद मिलेंगे।
विज्ञापन

2 of 6
अनुराग व पद्मावती - फोटो : अमर उजाला
टीवी सीरियल देखना भी बंद
अनुराग को इस बार उसे दसवीं की परीक्षा देनी है। उसकी मम्मी पद्मावती हाउस वाइफ हैं और टीवी धारावाहिक की शौकीन भी, लेकिन इस वक्त उन्होंने इस शौक को अपने बेटे की पढ़ाई के लिए छोड़ रखा है। कहती हैं कि हालांकि बेटा ट्यूशन पढ़ता है लेकिन उसकी इन दिनों नियमित मॉनीटरिंग जरूरी है। बोर्ड परीक्षा का प्रेशर उसपर हावी न हो, इसलिए उससे बात करना जरूरी है। उसके साथ कुछ समय बिताने को टाला नहीं जा सकता। उसके जागने-सोने के साथ ही इन दिनों मेरी दिनचर्या तय होती है।
विज्ञापन

3 of 6
वैष्णवी व सफलता सिंह - फोटो : अमर उजाला
किटी पार्टी अब परीक्षा के बाद
12वीं की छात्रा वैष्णवी की मम्मी सफलता सिंह सोशल भी हैं। यानी किटी पार्टी की सदस्य हैं। कहती हैं कि फिलहाल मैंने इन दिनों अपने सामाजिक दायरे को बेटी की पढ़ाई तक, उसके रूटीन तक सीमित कर रखा है। फ्रेंड्स से कह रखा है कि अब बच्चों की परीक्षा के बाद ही मुलाकात हो पाएगी।

4 of 6
लघिमा अग्रवाल व अर्चना अग्रवाल - फोटो : अमर उजाला
अब तो सीसीएल लेनी ही पड़ेगी
लघिमा अग्रवाल 12वीं की छात्रा हैं। मम्मी अर्चना अग्रवाल प्राइमरी स्कूल में टीचर हैं। कहती हैं कि अब सीसीएल लूंगी, ताकि बेटी की पढ़ाई पूरी करा सकूं। अर्चना कहती हैं कि इन दिनों मेरा टाइमटेबल एकदम बदल गया है। स्कूल के वक्त को छोड़कर घर में जितनी देर भी रहती हूं, मेरा टाइमटेबल लघिमा के हिसाब से होता है। बीच-बीच में इसे खाना, नाश्ता देना, रात को पढ़ते वक्त कॉफी बना कर देना मेरा रूटीन बन गया है।
विज्ञापन

5 of 6
शबाना अहमद - फोटो : अमर उजाला
बोर्ड परीक्षा की तैयारियों में जुटीं मम्मियों को टीचरों की सलाह
निगरानी करें पर रोक न लगाएं
अभिभावकों को निगरानी और रोक का फर्क समझना होगा। पढ़ाई के दौरान हर वक्त की रोक-टोक बच्चों को डिस्टर्ब करेगी। उन पर जबरदस्ती का दबाव न बनाएं। निगरानी का मतलब है कि यह ध्यान रखें कि वे अपनी पढ़ाई तय टाइम टेबल के हिसाब से कर रहे हैं या नहीं। उन्हें प्यार से समझाएं और बीच-बीच में पर्याप्त ब्रेक भी लेने दें। - शबाना अहमद, यूनिटी कॉलेज

 
विज्ञापन
विज्ञापन

6 of 6
तरु सक्सेना - फोटो : अमर उजाला
पढ़ाई के साथ खेल-मनोरंजन का भी रखें ध्यान
अभिभावक परीक्षा आते ही बच्चों पर पढ़ो-पढ़ो का दबाव बनाने लग जाते हैं। यह उचित नहीं है, जबरदस्ती का दबाव उनकी एकाग्रता में बाधा बनेगा। यदि आप पढ़ाई के साथ-साथ खेल, मनोरंजन पर भी बात करती रहेंगी, उन्हें छूट देती रहेंगी तो बच्चे खुशी-खुशी पढ़ेंगे। -तरु सक्सेना, प्रबंधक, सेंट एंजनिस पब्लिक कॉलेज
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें