दोपहर बाद खिली धूप में बाजे-गाजे के साथ लखनऊ की सड़कों पर रविवार को पहाड़ों की छटा उतरी। एक किलोमीटर की शोभायात्रा संग शहर में पर्वतीय महापरिषद की ओर से उत्तरायणी मेले का आगाज हुआ।
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उत्तरायणी मेला
- फोटो : amar ujala
दिन में मेले का आकर्षण परंपराओं के नाम रहा तो शाम को सांस्कृतिक संध्या ने पहाड़ी छटा से गोमा के तट को गुलजार किया। सुबह से ही महानगर रामलीला मैदान में शहर के पंतनगर, कल्याणपुर, गोमती नगर, तेलीबाग, सरोजनीनगर, राजाजीपुरम, भरतनगर, कुर्मांचल नगर से समाज केलोग जुटना शुरू हुआ।
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महानगर रामलीला मैदान में सामूहिक खिचड़ी भोग के बाद शंख वादन के बीच कैबिनेट मंत्री बृजेश पाठक की मौजूदगी में यात्रा रवाना हुई। महानगर रामलीला मैदान, गोल मार्केट चौराहा, बादशाहनगर चौराहा, निशातगंज ओवरब्रिज, बीरबल साहनी मार्ग होते हुये गोमती तट स्थित मेला स्थल पं. गोविंद बल्लभ पंत पर्वतीय सांस्कृतिक उपवन पहुंची।
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कई जगह यात्रा पर फूलों की बारिश भी हुई। तुरही, ढोल, ढमाऊ, रणसिंघा वादन यंत्रों ने आकर्षण चुराया। सेना के बैंड समेत गोमती नगर से आई नन्दा राजजात यात्रा की झांकी भी संग चली। छोलिया दल के नृत्य के साथ पर्वतीय समाज की सैकड़ों महिलाएं उत्तराखंड की रंगोली पिछौड़ा एवं आभूषण संग गान करती हुई चलीं। ं
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200 से अधिक युवा विशेष वर्दी में पूरी शोभा यात्रा की व्यवस्था एवं सुरक्षा करते चले। तीन घंटे बाद यात्रा मेले तक पहुंची। मेला स्थल द्वार पर उत्तराखण्ड केे शगुन आंखर के महिलाओं द्वारा गायन से शोभा यात्रा का स्वागत हुआ। आठ कुमाऊँ रेजीमेन्ट के बैंड ने मोहक पर्वतीय धुनें सुनाई।
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समारोह के मुख्य अतिथि उपमुख्यमंत्री डा. दिनेश शर्मा रहे। कौथिग के शुरुआत के बाद उन्होंने कहा कि पहाड़ सदैव से देवभूमि के रूप में जाना जाता रहा है, लोग मेहनती और संस्कृति से जुड़े रहते हैं। मंत्री स्वाति सिंह, महापौर संयुक्ता भाटिया समेत तमाम ने यात्रा का स्वागत किया।
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महापौर ने कहा कि उत्तराखंड की संस्कृति भारतीय संस्कृति की जड़ है। संस्कृति का यह विशाल वट वृक्ष पूरे देश में फैला हुआ है पर इसका पौधा उत्तराखण्ड में स्थित है। मौकेपर शाम के सत्र में कैबिनेट मंत्री डॉ. रीता बहुगुणा जोशी ने पहाड़ों की तीजनबाई मानी जाने वाली पद्मश्री बसन्ती बिष्ट को ‘पर्वत गौरव’ सम्मान से सम्मानित किया।
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पद्मश्री बसंती बिष्ट ने कहा कि यहां की महिलाओं को देखकर महसूस होता है कि लखनऊ में मिनी उत्तराखण्ड बसता है। सांस्कृतिक आयोजनों के तहत शुरुआत सांस्कृतिक सचिव गोपाल दत्त जोशी ने न्योली गीत ‘गोरी गंगा भागीरथी, मन की पीड़ मने मां’ से की।
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महापरिषद के कलाकारों ने ‘उत्तरायणी कौथिग में सबुन को सत्कार छू’.. पर पंडाल के लोगों को झुमाया। लोकगायिका पद्मश्री बसंती बिष्ट ने दो घंटे तक लोकगवनई की बयार बहाई।