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कपड़े प्रेस करते हैं माता-पिता, बेटी ने 12 वीं में 95 फीसदी अंक प्राप्त कर किया नाम रोशन

Fri, 03 May 2019 07:28 PM IST
Amulya Rastogi सचिन त्रिपाठी, अमर उजाला लखनऊ
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मां अर्चना और पिता दिनेश के साथ निधि कन्नौजिया - फोटो : amar ujala
हौसले, लगन और ईमानदारी से की गई मेहनत का कोई विकल्प नहीं होता। निधि कन्नौजिया इसका एक बेमिसाल उदाहरण है। सीबीएसई 12वीं में उसने 95 फीसदी अंक हासिल किए। उसकी यह सफलता कई मायने में खास है, क्योंकि वह एक ऐसे परिवार से है, जो इस्तरी कर अपना गुजारा करता है। लखनऊ के  गोमती नगर के एक खाली पड़े प्लॉट पर बनी झोपड़ी में रहते हैं वे लोग। झोपड़ी में चारों तरफ लटक रहे मेडल निधि की लगन और मेहनत की कहानी सुनाते हैं।
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निधि के मेडल - फोटो : amar ujala
स्टडी हाल स्कूल के पास झोपड़ी में रहने वाले दिनेश मूलत: बाराबंकी के हैं। पत्नी अर्चना व बच्चों के साथ वे रोजी-रोटी की तलाश में लखनऊ आ गए। सिर पर छत नहीं थी तो दया कर एक डॉक्टर साहब ने झोपड़ी खाली प्लॉट पर डालने को दे दी।अर्चना और दिनेश दोनों निरक्षर थे, लेकिन यह लालसा थी कि बच्चे जरूर पढ़ें। शुरुआत में बेटी को स्टडी हाल में वंचित वर्ग के बच्चों के लिए संचालित प्रेरणा गर्ल्स स्कूल में दाखिला दिला दिया। होशियार निधि को स्कॉलरशिप मिलने लगी। 
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मां अर्चना और पिता दिनेश के साथ निधि कन्नौजिया - फोटो : amar ujala
उसकी प्रतिभा देखकर विद्यालय प्रबंधन ने मुख्य धारा के स्टडी हाल स्कूल में दाखिला दे दिया। घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी तो विद्यालय प्रबंधन ने पूरी फीस माफ कर दी। अब निधि ने 12वीं में 95 फीसदी अंक हासिल कर माता-पिता के साथ स्कूल का नाम भी रोशन कर दिया। दिनेश का बड़ा बेटा मनोज भी बीए पास है। वहीं, दो बेटियों की शादी हो चुकी है। 

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मां अर्चना और पिता दिनेश के साथ निधि कन्नौजिया - फोटो : amar ujala
सब कह रहे बिटिया ने बहुत नंबर पाए हैं
मैं तो पढ़ी-लिखी नहीं हूं। इसलिए यह पता नहीं कि बिटिया को कितने नंबर मिले हैं। हां, सब लोग कह रहे हैं कि  उसने बहुत नंबर पाए हैं, इसलिए खुशी हो रही है... ये शब्द हैं निधि की मां अर्चना के। उनका सपना है कि बेटी अफसर बने।
 
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मां अर्चना के साथ निधि कन्नौजिया - फोटो : amar ujala
आईएएस बनना है लक्ष्य
निधि कॅरिअर में दो विकल्प लेकर चल रही है। आईएएस बनना और किसी वजह से यदि ये नहीं हो पाता तो शिक्षक बनकर वह बच्चों को पढ़ाएगी। निधि ने बताया कि झोपड़ी में रहकर पढ़ाई करने और मां-पापा के त्याग से ही उसे और अधिक मेहनत करने की प्रेरणा मिली। कहा, जब तक उसे मंजिल नहीं मिल जाती वह रुकने वाली नहीं है।
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