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लखनऊ की बेटी को सिविल सेवा परीक्षा में मिली नौवीं रैंक, मेधावियों ने साझा किए कामयाबी के मंत्र

Sat, 06 Apr 2019 04:32 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ
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सिविल सेवा परीक्षा - फोटो : amar ujala
सिविल सेवा परीक्षा-2018 के परिणाम में राजधानी लखनऊ के मेधावियों ने एक बार फिर से अपनी चमक बिखेरी। गुंजन द्विवेदी ने देश भर में नौंवी रैंक हासिल की। इसके अलावा आयुषी और शक्ति मोहन अवस्थी समेत कई मेधावियों ने सिविल सेवा में सफल होकर अपना लोहा मनवाया। ‘अमर उजाला’ ने इन मेधावियों से बात करके उनकी सफलता व तैयारी के राज जानने की कोशिश की, पेश है रिपोर्ट-
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सिविल सेवा परीक्षा - फोटो : amar ujala
नौकरी छोड़कर की तैयारी
मेरी शुरुआत से ही आईएएस अधिकारी बनने की इच्छा थी। बीआईटी, रांची से सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद एक साल निजी कंपनी में काम किया। दिल्ली जाकर तैयारी की और तीसरे प्रयास में 154 रैंक हासिल की। दूसरे प्रयास में आईआरएस के लिए चयनित हुआ। दादा बृजमोहन अवस्थी ने हमेशा आगे बढ़ने की प्ररेणा दी। तैयारी के दौरान वे साथ भी रहे। मैंने गलतियों से सीखा।
- शक्ति मोहन अवस्थी, रैंक 154

 
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सिविल सेवा परीक्षा - फोटो : amar ujala
देश और समाज के लिए काम करने का सर्वश्रेष्ठ माध्यम
देश और समाज के लिए काम करने के कई तरीके हो सकते हैं, लेकिन सिविल सेवा इसका सर्वश्रेष्ठ माध्यम है। पापा सिविल सेवा में थे इसलिए भी बचपन से ही प्रशासनिक सेवा में जाने का मन बना लिया था। यह कहना है सिविला सेवा परीक्षा-2018 में नौंवी रैंक लाने वाली गुंजन द्विवेदी का। गुंजन के पिता अशोक कुमार धर द्विवेदी वर्ष 2017 में डीजी वायरलेस पुलिस पद से सेवानिवृत्त हुए हैं।
गुंजन द्विवेदी ने बताया कि वर्ष 2014 दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक करने के बाद सिविल सेवा की तैयारी में ही जुट गई थीं। पहले दो प्रयास में तो उन्हें प्रारंभिक परीक्षा तक में सफलता नहीं मिली। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। लेकिन इस बार न सिर्फ प्रारंभिक परीक्षा पास की बल्कि मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार के बाद देश भर में नौंवी रैंक हासिल की। अपनी सफलता का श्रेय गुंजन अपने पिता के साथ ही मां सुमन द्विवेदी को देती हैं।-  गुंजन द्विवेदी (9वीं रैंक)

टिप्स-
सिविल का कोर्स बहुत ज्यादा है इसलिए हिम्मत न हारें, आत्मविश्वास बनाए रखें और कड़ी मेहनत करते रहें। कई बार नकारात्मक विचार आएंगे, लेकिन उनको पीछे छोड़कर आगे बढें, सफलता जरूर मिलेगी।
 

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सिविल सेवा परीक्षा - फोटो : amar ujala
पढ़ाई के साथ आराम जरूरी
मैंने जयपुरिया स्कूल से हाईस्कूल और इंटरमीडिएट किया है। पीजी दिल्ली यूनिवर्सिटी से किया। सिविल सेवा परीक्षा में सफलता हासिल करने के लिए पढ़ाई जितना ही अहम होता है उतना ही शरीर को आराम देना। मैं रोजाना जॉगिंग के लिए समय जरूर निकालती हूं। साथ ही मैं रिलैक्स होने के लिए फिल्में देखती हूं और नॉवेल पढ़ना पसंद है। मेरी मां शोभा जैन का मेरी सफलता में अहम योगदान है।
- दीक्षा (22 वीं रैंक)
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सिविल सेवा परीक्षा - फोटो : amar ujala
स्नातक के साथ ही सिविल सेवा की तैयारी
पिता जय प्रकाश सिंह आईपीएस ऑफिसर हैं। वे मेरी प्रेेरणा हैं, इसलिए मैंने स्नातक के साथ ही सिविल सेवा की तैयारी शुरू कर दी थी। यह मेरा चौथा प्रयास था, लेकिन मैंने हिम्मत नहीं हारी। दिल्ली यूनिवर्सिटी से राजनीतिशास्त्र में बीए ऑनर्स किया है। मेरी सफतला में मेरी मां पुष्पा सिंह का योगदान बेहद अहम है। उन्हीं की वजह से मैंने परीक्षा में सफलता हासिल की।
- आयुषी सिंह (86वीं रैंक)
 
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एक किताब ने बदल दी राह
आरबीआई के पूर्व गवर्नर वाईवी रेड्डी द्वारा लिखित एडवाइस एंड डिसेंट से इतनी प्रभावित हुईं कि मैंने अपने भविष्य की राह बदल दी। लामार्ट गर्ल्स से स्कूलिंग करने के बाद कोलकाता के राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय से एलएलबी की पढ़ाई की और एक संस्था के लिए काम करने लगी। सिविल सेवा की तैयारी के लिए दिल्ली में जुट गई और पहले ही प्रयास में सफलता हासिल की। पिता असित कुमार चतुर्वेदी वरिष्ठ अधिवक्ता हैं और बड़ी बहन डॉ. अदिति चतुर्वेदी टाटा कैंसर इंस्टीट्यूट में सर्जन हैं। मैं देश की सेवा करना चाहती हैं। दृढ़ निश्चय को अपनी सफलता का मूल मंत्र मानती हूं। - अन्विति चतुर्वेदी, (रैंक 122)


 
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सिविल सेवा के लिए लगातार परिश्रम जरूरी
सिविल सेवा में सफलता के लिए लगातार परिश्रम जरूरी है। लामार्टीनियर बॉयज से 12वीं की परीक्षा पास करने के बाद मैंने आईआईआईटी इलाहाबाद से आईटी से बीटेक किया। वर्ष 2016 से जुलाई 2017 तक नोएडा की एक सॉफ्टवेयर कंपनी में जॉब के साथ-साथ ही सिविल सेवा की तैयारी भी की। 2017 में प्रारंभिक परीक्षा में चयन हुआ था। उस समय सफलता नहीं मिली, लेकिन इस साल सफलता हासिल हुई है। इसका श्रेय मैं अपने पिता प्रो. निशीथ राय, मां अनीता राय के साथ ही अपने जीजा मनीष कुमार और बहन डॉ. शचि राय को देना चाहता हूं।  - विभू शेखर (173वीं रैंक)
 
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सेल्फ स्टडी करें, कोचिंग के पीछे मत भागें
सेल्फ स्टडी पर ज्यादा ध्यान दें और कोचिंग के पीछे न भागें। अच्छी किताबें और नोट्स से अपनी बेसिक को क्लीयर करें। साथ में लेखन कला पर खास ध्यान दें। मैं मूल रूप से लुधियाना का रहने वाला हूं। मैंने पांचवे प्रयास में सिविल सेवा परीक्षा में 217 रैंक हासिल की है। 2017 में आईआरटीएस के लिए चयनित हुआ - अभिषेक गुप्ता (रैंक 217)
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