गोरखपुर में जिस तरह निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद के बेटे प्रवीण निषाद को सपा ने प्रत्याशी बनाया, वैसा ही प्रयोग कुछ और सीटों पर हो सकता है। पीस पार्टी, अपना दल, वामपंथी समेत अन्य छोटे दलों के नेताओं को लोकसभा में पहुंचाने के लिए उन्हें दूसरे दलों के सिंबल पर चुनाव लड़ाया जा सकता है। सपा सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस को भी गठबंधन में रखने के प्रयास हो रहे हैं लेकिन यह इस पर निर्भर करेगा कि मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ व राजस्थान में इस साल के आखिर में होने वाले चुनाव को लेकर कांग्रेस का बसपा व सपा के प्रति क्या रुख रहता है?