गन्ना किसानों की समस्याओं को लेकर देश और प्रदेश की राजनीति में अपनी अलग धाक और साख जमाने वाले बेनी बाबू की मुलायम सिंह यादव से गहरी दोस्ती थी। यही कारण था कि बेनी बाबू की मुलायम सिंह से खटकी तो बगावत कर अलग दल बना लिया। फिर कांग्रेस में भी शामिल हो गये। लेकिन नेता जी ने उनके खिलाफ एक शब्द भी नहीं बोला। बाद में दल में वापस लौटने पर राज्यसभा भेज दिया।
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बेनी प्रसाद वर्मा व मुलायम सिंह यादव
- फोटो : amar ujala
दोनों में रिश्ते इतने गहरे थे कि बेनी बाबू ने दल तो छोड़ा पर मुलायम सिंह यादव ने अपने दिल से उन्हें नहीं निकाला। नेता जी उन्हें सूझबूझ वाला और प्रदेश की राजनीति का अच्छा ज्ञान रखने वाला नेता मानते थे। विकास की बात की जाए तो दोनों नेताओं ने एक ही दिन चुना। इटावा का सैफई हो या बाराबंकी का सिरौलीगौसपुर दोनों को ब्लॉक और तहसील का दर्जा एक साथ दिया गया। संचार मंत्री के रूप में सैटेलाइट सिस्टम से सीधे बात करने की सुविधा भी सिरौलीगौसपुर से सैफई के लिए की गई।
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बेनी प्रसाद वर्मा(फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
पांच दशक तक राजनीति के अर्श से फर्श तक का सफर तय करने वाले जिले के खाटी समाजवादी नेता बेनी प्रसाद वर्मा को राजनीति में रामसेवक यादव लाए थे पर उनकी दोस्ती के बीच के कुछ साल छोड़ दिए जाएं तो मुलायम सिंह यादव से इतने गहरे संबंध शायद किसी से नहीं थे। सपा में नेता जी के बाद वही नंबर दो पर रहे हैं। अजीत सिंह के मुकाबले उन्हें मुख्यमंत्री बनाने में सबसे अहम भूमिका बेनी बाबू की ही थी।
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बेनी प्रसाद वर्मा(फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
चार बार सांसद, दो बार विधायक रहे रामसागर रावत बताते हैं कि जब बेनी बाबू नाराज होकर पार्टी से अलग होने वाले थे उसी बीच वह नेताजी के साथ दक्षिण भारत के दौरे पर गए थे। मदुरई के डाक बंगले में नेता जी ने बातचीत के दौरान कहा कि संघर्ष की लड़ाई में साथ रहने वाले बेनी प्रसाद वर्मा सबसे सूझबूझ और भरोसे वाले नेता हैं उन्हें पूरे प्रदेश का ज्ञान है। पार्टी में कोई और नहीं है।
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बेनी प्रसाद वर्मा(फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
रामसागर रावत की इस जानकारी से साफ हो गया कि बेनी बाबू के लिए मुलायम सिंह के दिल में कितनी जगह है। उन्होंने कहा कि वह चापलूसी नहीं करते थे। कड़वी दवाई थे जिससे फायदा मिलता था। तीस साल से बेनी बाबू के साथ रहने वाले बजरंग बताते हैं कि अभी भी दोनों नेताओं के बीच बातचीत होती रहती थी।
एक दूसरे कि सेहत की चिंता करते थे। आज बेनी बाबू हम लोगों के बीच नहीं रहे पर उनके द्वारा कराए गए विकास कार्य लोगों के हर जुबान पर हैं। छोटे से गांव को ब्लॉक, तहसील, बैंक, गेस्ट हाउस, स्वीमिंग पूल की बात हो या जिले में सड़कों का जाल और संचार विभाग का नेटवर्क फैलाने का मामला सब उन्हीं के नाम है।