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फेस रीडिंग वाला एटीएम कार्ड बचाएगा क्लोनिंग और जालसाजी से, ये है बैंकों का प्लान

Sun, 25 Feb 2018 11:35 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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साइबर जालसाज और क्लोनिंग करने वालों से निपटने के लिए बैंकों ने तैयारी शुरू कर दी है। इसके तहत बैंकों ने अपने उपभोक्ताओं को फेस रीडिंग वाले कार्ड जारी करेंगे। इस कार्ड की खासियत है कि एटीएम केबिन में सीसीटीवी कैमरे पहले उपभोक्ताओं की फेस मैपिंग करेंगे उसके बाद ही एटीएम काम करना शुरू करेगा।

यह जानकारी गाजीपुर थाने में ‘साइबर मामलों की विवेचना को आसानी से कैसे करें’ विषय पर आयोजित कार्यशाला में विशेषज्ञों और बैंक से जुड़े अधिकारियों ने दी। इस दौरान कई दरोगाओं ने कई सवाल विवेचना से संबंधित किए, जिसमें कुछ के जवाब तो मिले कुछ अधूरे रह गए।
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कार्यशाला में एक निजी बैंक के सीनियर मैनेजर व साइबर एक्सपर्ट हिमांशु शर्मा और रिटायर्ड डिप्टी एसपी ओपी सिंह ने कई महत्वपूर्ण जानकारियां दीं। उन्होंने पुलिस कर्मियों को बताया कि जालसाजी योजनाबद्ध तरीके से की जाती है। ज्यादातर मामले में फर्जी पहचान पत्र के आधार पर खाते खोलने से लेकर बैंक से जुड़े अन्य काम किए जाते हैं। ताकि उन तक आसानी से पुलिस न पहुंच सके।
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अधिकारियों ने इस बात को भी माना कि जालसाजों की मदद बैंक के कुछ अधिकारी व कर्मचारी भी करते हैं। ऐसे लोगों को चिह्नित किया जा रहा है ताकि बैंकिंग कारोबार में लोगों का भरोसा कायम रहे। कार्यशाला में इंस्पेक्टर गाजीपुर सुजीत राय ने कहा कि ऐसे मामलों की जांच जल्द पूरी कर आरोपी पर कार्रवाई के लिए क्या उपाय होने चाहिए।

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इस पर साइबर एक्सपर्ट हिमांशु शर्मा ने कहा कि ऐसे मामलों में खाता और इंश्योरेंस पॉलिसी शुरू करने के लिए लगाए गए दस्तावेजों की सही से जांच की जानी चाहिए। साथ ही किस अधिकारी या कर्मचारी ने दस्तावेज को प्रमाणित किया है। उसके बारे में जानकारी लें।  कार्यशाला में सीओ गाजीपुर अवनीश्वर श्रीवास्तव, एसआई कमलेश राय, राजेश राय, राकेश सिंह, प्रेमचंद्र सिंह सहित कई लोग मौजूद थे।
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ठगी के शिकार होने से बच गए इंस्पेक्टर
कार्यशाला में इंस्पेक्टर सुजीत राय ने बताया कि उनके निजी मोबाइल पर शनिवार को एक कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को उस मोबाइल नंबर का मालिक बताया। उसने कहा, वह काफी दिनों से विदेश में रहता है। उसका नंबर बंद होने के बाद सुजीत राय को मिल गया। इसी नंबर पर उसके मेल और बैंक की डिटेल आती है। कुछ देर में उनके मोबाइल पर एक ओटीपी कोड आएगा, जिसकी जानकारी उसे दे दें। ताकि वह अपना दूसरा मोबाइल नंबर बैंक से लिंक करा सकें। बाद में परिचय देने पर सामने वाले ने काल काट दी।
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