रेन टेस्ट...। चौंकिए नहीं। लखनऊ के इंतजामों का बारिश ने जो इम्तिहान लिया उसमें सब फेल। रात हो या दिन घर लौटिए। याद कीजिए, आपका घर पहुंचने पर पहला रिएक्शन क्या होता है- शुक्र है, गड्ढों से बच आए। आजकल चर्चा का पहला विषय होता है, आज तो सड़क पर बहुत पानी था। कैसे बचते-बचाते आए हैं। ये हाल शहर की मुख्य सड़कों से लेकर शहर से सटे गांवों तक का है।
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जलभराव
- फोटो : amarujala
शहर की सड़कों का बुधवार शाम तक हुई 80.6 मिमी. बारिश ने और भी बुरा हाल कर दिया। खासकर उन जगहों पर खतरा और बढ़ गया जहां सड़कें बिजलीे, मोबाइल-इंटरनेट, पीएनजी कनेक्शन के लिए खोदी गई थीं। इन जगहों पर काम खत्म होने के बाद बनाई गई सड़कधसक रही हैं। वहीं पटरी कटने से गोमतीनगर से लेकर अलीगंज, मुंशीपुलिया, आशियाना कालोनी, जानकीपुरम योजना तक में सड़क धंस रही हैं।
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टूटे पेड़
- फोटो : amarujala
बारिश के ये तेवर अभी दो-तीन दिन बरकरार रह सकते हैं। आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र के मौसम विज्ञानियों के मुताबिक मानसूनी टर्फ अब भी राजधानी के आसपास के इलाकों के करीब से गुजर रही है। सिस्टम कमजोर हुआ है, लेकिन इतना नहीं कि बारिश एकदम से रुक जाए। अगले दो-तीन दिनों तक अभी लखनऊ समेत आसपास के इलाकों मे बादलों के छाए रहने के साथ रुक-रुक कर कहीं धीमी तो कहीं तेज बारिश के आसार हैं।
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टूटे पेड़
- फोटो : amarujala
मौसम का ऐसा रहा हाल
24 घंटों के दौरान 80.6 मिमी. बारिश दर्ज हुई।
28 जुलाई से बुधवार शाम तक 207 मिमी. बारिश हो चुकी है।
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टूटे पेड़
- फोटो : amarujala
यहां सड़कें खतरनाक हैं, संभलकर ही चलें
- इंदिरानगर सी ब्लॉक में भूमिगत नाला की वजह से सड़क धंसी
- जेटीआरआई विनीतखंड के बगल में टेलीकॉम कंपनी की खोदाई से सड़क धंसी
- इंजीनियरिंग चौराहा पर बिजली की लाइन की खोदाई बनी सड़क धंसने की वजह
- सेक्टर एफ जानकीपुरम में सीवर लाइन चोक तो सड़क धंसी
- पुरनिया चौराहा पर टेलीकॉम कंपनी की खोदाई से सड़क कई जगह धंसी
- पुरनिया फ्लाईओवर के नीचे बिजली की लाइन की वजह से सड़क धंसी
- विवेकखंड गोमतीनगर में ग्रीन गैस लिमिटेड की पीएनजी लाइन केलिए खोदे चैंबर सड़क धंसने की वजह बन रहे
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जलभराव
- फोटो : amarujala
बारिश से कई इलाकों में हालात बदतर हो गए हैं। फैजुल्लागंज में लोग घरों में कैद हो गए हैं। पटेलनगर में भी घुटनों तक पानी भरा है। घर में कैद लोगों को मदद मिलनी चाहिए। पर, जिला प्रशासन कैसी मदद दे रहा है इस्माइलगंज प्रथम की पार्षद अमिता सिंह बताती हैं कि वहां से तो सिर्फ लाई-चना मिला। लोगों को दूध-ब्रेड चाहिए....हमने इंतजाम किया।
ईको पार्क से केकेसी के बीच करीब डेढ़ किमी में दर्जन भर पेड़ गिर गए। इससे ट्रैफिक पूरे इलाके में बाधित हो गया। बादलों की आवाजाही देखते हुए लोग घर जल्दी पहुंचने की कोशिश करने लगे तो जगह-जगह ट्रैैफिक ध्वस्त हो गया।