सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद रविवार को सूरज की पहली किरण नई अयोध्या का सपना लेकर आई। सरयू रोज की तरह अपनी रौ में बह रहीं थीं, लेकिन स्नान करने आए साधु-संतों से लेकर श्रद्धालु नए जोश और उम्मीद में थे। हनुमानगढ़ी, कनकभवन, रामलला की ओर जाने वाले मार्गों पर बैरिकेडिंग की तमाम बंदिशें, आईडी की जांच और पूछताछ बाहरी भक्तों के आने का सिलसिला नहीं रोक पा रहे थे। मुस्लिम समुदाय राममंदिर फैसले पर पाकिस्तान की प्रतिक्रिया से खफा था, वह पूरे मसले को अंतहीन विवाद, बहस, तनाव से मुक्ति के रूप में देखता नजर आया।
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अयोध्या का एक दृश्य।
- फोटो : amar ujala
अयोध्या की नई सुबह बेहद खास थी। जहां जाईए वहीं समरसता और आकाश छूने की ललक दिखी। सुबह सरयू तट पर बंदिशों की वजह से बाहरी श्रद्धालु तो नहीं थे, लेकिन मठ-मंदिरों के संत-धर्माचार्य और कल्पवास कर रहे भक्त भोर से ही पहुंचने लगे थे। लटें लहराते हुए स्थानीय साधु रामनाथ और जौनपुर से आए इंद्रमणि दास ने कहा कि दो पक्षों का झगड़ा राम जी ने समाप्त कर दिया। अब सिर्फ अयोध्या ही नहीं, बल्कि समूचा भारत शांति, सौहार्द और तरक्की के रास्ते पर आगे बढ़ेगा। सरयू घाट पर भक्तों को पूजन-अर्चन करा रहे रामचरित्र पांडेय सुप्रीम कोर्ट के फैसले से बेहद खुश थे, बोले-हमारी चौकी का महत्व अब दुनिया देखेगी। राममंदिर बनते ही अब सिर्फ मेले में ही नहीं बल्कि हमेशा हिंदुओं की तादात अन्य तीर्थस्थलों में सर्वाधिक होगी।
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एक दूसरे के गले लगते हुए
- फोटो : अमर उजाला
परिक्रमा मार्ग बैरिकेडिंग से अछूता था, घाट से लक्ष्मणघाट, झुनकीघाट, गोलाघाट होते हुए गुरूद्वारा ब्रहमकुंड पहुंचने पर अलग ही नजारा था। मुख्यग्रंथी ज्ञानी गुरूजीत सिंह फैजाबाद और अयोध्या दोनों शहर के व्यापारियों के साथ सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर चर्चा कर रहे थे। बोले कि यहां गुरूनानक जी ने तपस्या की थी, गुरू गोविंद सिंह भी आए और राममंदिर आंदोलन में साथ दिया था। अब अयोध्या का भविष्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कोर्ट ने सौंप दिया है। उनमें गुरू गोविंद व राम की शक्ति विराजमान है उम्मीद है कि भव्य राममंदिर के साथ सिख धर्म के स्थलों का भी यहां विकास होगा।
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ayodhya verdict
- फोटो : अमर उजाला
जिला महिला अस्पताल रिकाबगंज के पास ज्वेलर्स के मालिक पृथ्वी पाल सिंह बोले- सही मायने में राम की नगरी अयोध्या का आज नया सवेरा हुआ है। देखिएगा यहां कैसे व्यापार दिनदूना रात चौगुना बढ़ता है। सहमति जताते हुए नियावां के वीरेंद्र शेरवानी और अमानीगंज गुरूद्वारा के बलविंदर सिंह कहते हैं कि अयोध्या भी सिख धर्म का बड़ा केंद्र बनने जा रहा है। सिर्फ यहां के सांप्रदायिक झगड़े से देश विदेश के सिख समुदाय आने से कतराते थे। थोड़ा आगे बढ़ने पर भगवान ऋषभदेव की सरयू किनारे भव्य प्रतिमा और पार्क सूना मिला। लेकिन अतिसंवेदनशील इलाका होने से चारों तरफ बल्लियों से घिरे आलमगंज कटरा स्थित जैन मंदिर में आए भक्त अयोध्या के नए सवेरे से बेहद खुश थे। वे बोले-भगवान राम के इक्ष्वाकु वंश से ही जैन धर्म के सभी 24 तीर्थंकर आते हैं। आदि तीर्थंकर ऋषभदेव सहित पांच तीर्थंकर की जन्मस्थली अयोध्या है। लेकिन मंदिर-मस्जिद विवाद से परिवार लेकर आने में बहुत डर लगता था।
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अयोध्या
- फोटो : amar ujala
गुजरात के पालपुर पाटिया सूरत से आए हार्दिक भाई मोरखिया बोले-पार्श्वनाथ तक दर्शन करने जाना है। सुबह ही वाराणसी जाना था लेकिन फैसले के बाद एक दिन और रूककर जाने का मन कर रहा है। उनकी पत्नी निकिता बोलीं-मैनें अयोध्या का माहौल दोस्तों को बताया तो अब सब यहां आकर तीर्थंकर भगवान की जन्मस्थली का दर्शन पूजन करना चाहते हैं। वे बोलीं बगल में छपिया है जहां भगवान स्वामी नारायण का जन्म हुआ था कि उनकी ज्ञान भूमि अयोध्या है, जबकि कर्मभूमि गुजरात है।
अब गुजरात का अयोध्या में आकर्षण बहुत बढ़ जाएगा। आगे बढ़ने पर दुराही कुआं स्थित शांतिभवन मंदिर के मुख्य दरवाजे को बंद करके पुलिस का पहरा था। यह दरवाजा ठीक दूसरी तरफ रामजन्मभूमि की बैरीकेडिंग से सटा है। महंत हीरादास मिलते ही सुप्रीम कोर्ट के फैसले को सुनाने लगे बोले कि अब 80 साल उम्र हो गई, जीवन में कभी ऐसी खुशी सुनने को नहीं मिली थी। हमने दो बीघा जमीन पहले ही भगवान को दान कर दी थी। अब सरकार जो चाहे हमसे ले ले। यहां तो हमारे साधु-भक्त भी डर की वजह से नहीं रूकते, सिर्फ फोर्स के लोग रहते हैं।