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6 अप्रैल से शुरू होंगे नवरात्र, कलश स्थापना के लिए ये है शुभ मुहूर्त, ऐसे करें देवी की अाराधना

Mon, 01 Apr 2019 12:01 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ
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हिंदू नव संवत्सर चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा के साथ ही 6 अप्रैल से वासंतिक नवरात्र शुरू होने जा रहे हैं। भक्त मां के नौ रूपों को पूजने सुबह से ही देवी मंदिरों में उमड़ेंगे। आचार्य प्रदीप ने बताया कि इस बार किसी तिथि का क्षय नहीं होने की वजह से नवरात्र नौ दिन के रहेंगे।
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कलश स्थापना का अभिजित मुहूर्त सुबह 11:30 बजे से 12:18 तक और इसके अलावा सुबह से लेकर दोपहर 2:58 बजे तक कलश स्थापना की जा सकेगी। नवरात्र करीब आते ही शहर के देवी मंदिरों में तैयारियों ने जोर पकड़ा है। चर्चित मंदिरों में जहां देवी का थीम आधारित शृंगार व पूजन की तैयारी है, वहीं कई बड़े मंदिरों की विशेष सजावट जारी है।
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ठाकुरगंज के मां बाघंबरी पूर्वी देवी सिद्धपीठ मंदिर, शास्त्रीनगर दुर्गा मंदिर, चौपटियां के संदोहन देवी मंदिर में इस बार भी हर दिन बदली हुई थीम पर मां का शृंगार होगा। फल, फूल, मेवा, शाकभाजी, टॉफी, चॉकलेट, मयूर आदि से सजावट होगी।

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ऐसे करें नौ दिन देवी की आराधना
नवरात्र में हर दिन देवी को अलग-अलग नैवेद्य चढ़ाने से मनोकामना पूरी होती है। प्रथम दिन गो घृत से आरोग्य की प्राप्ति, द्वितीय दिन शक्कर से दीघार्यु की प्राप्ति, तृतीय दिन दूध से दुखों की निवृत्ति, चतुर्थ दिन मालपूआ से निर्णय शक्ति का विकास, पंचम दिन केले से बुद्धि का विकास, षष्ठी के दिन मधु से आकर्षण व सुंदरता, सप्तमी पर गुड़ से शोक मुक्ति और विपत्तियों से रक्षा, अष्टमी के दिन नारियल से हर प्रकार की पीड़ा का शमन, नवमी के दिन धान से लोक परलोक का सुख, दशमी के दिन काले तिल से भय से मुक्ति मिलती है।
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आचार्य एसएस नागपाल ने बताया कि  नवरात्र में घट स्थापना, जौ बोने, दुर्गा सप्तशती का पाठ, हवन व कन्या पूजन से मां प्रसन्न होती है। नवरात्र में देवी मंत्र से आराधना और दुर्गा सप्तशती का पाठ बहुत फलदायी होता है। इस बार नौ दिन के इस नवरात्र में पांच बार सर्वार्थ सिद्धि, दो बार रवियोग रहेगा। नवरात्र शनिवार के दिन रेवती नक्षत्र के साथ शुरू हो रहे हैं। उदय काल में रेवती नक्षत्र का योग साधना व सिद्धि में पांच गुना अधिक शुभ फल प्रदान करेगा।

 
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अरोग्यता के लिए नीम के पत्ते व काली मिर्च का करें सेवन
नवरात्र के पहले दिन से ही हिंदू नववर्ष की शुरुआत होती है। विक्रम संवत् 2076 ‘परिधावी’ संवत्सर की शुरुआत 6 अप्रैल 2019 से होने जा रही है। ज्योतिषाचार्य एसएस नागपाल ने बताया कि इसी तिथि पर देवपिता ब्रह्माजी ने सृष्टि का निर्माण किया था। सम्राट विक्रमादित्य ने संवत्सर का आरंभ इसी तिथि से किया था। बताया कि नए संवत्सर में राष्ट्र में विरोधाभास की स्थिति बनी रहने वाली है।
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मौसम का प्रतिकूल प्रभाव भी दिख सकता है। विरोधी देशों के मध्य टकराव और युद्ध जैसी स्थितियां उभर सकती हैं। संवत् में 2 सूर्य ग्रहण और 2 चंद्र ग्रहण होंगे। उन्होंने बताया कि  नए वर्ष के पहले दिन पंचांग का पूजन कर वर्षफल सुना जाता है। निवास स्थानों पर ध्वजा और बंदनवार लगाते हैं। नीम के नए कोमल पत्तों, जीरा, काली मिर्च, हींग, नमक को पीसकर खाने से वर्ष भर अरोग्यता रहती है।
 
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