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खतरनाक थे कांग्रेस के इस हाईप्रोफाइल नेता के मंसूबे, वारादात के लिए मंगवाई थी हथियारों की बड़ी खेप

Thu, 21 Sep 2017 06:29 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ
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गैंगस्टर एक्ट में गिरफ्तार किए गए कांग्रेसी नेता संदीप तिवारी उर्फ पिंटू से हुई पूछताछ में हैरान करने वाले खुलासे सामने आए हैं। उसके बारे में पंजाब पुलिस को सूचना मिली थी कि उसने किसी बड़ी वारादात को अंजाम देने के लिए बड़ी मात्रा में हथियारों की खेप मंगवाई थी। (चुनाव प्रचार के दौरान क्रिकेटर मोहम्मद अजहरुद्दीन, कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद व अभिनेत्री नगमा के साथ संदीप तिवारी)

पंजाब पुलिस को संदीप तिवारी के मादक पदार्थों की तस्करी व राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में भी शामिल होने की आशंका है। उसे नाभा जेल ब्रेक के मास्टर माइंड गोपी धनश्यामपुरा को छुड़ाने के लिए यूपी के एक आईपीएस अफसर से डील करने के आरोप में शनिवार को पंजाब पुलिस व यूपी एटीएस ने गिरफ्तार किया था। उसके करीबियों को पकड़ने के लिए पंजाब पुलिस के अफसरों ने सुल्तानपुर में डेरा जमा लिया है।

संदीप ने अपनी ताकत के दम पर क्षेत्र में काफी दबदबा बना लिया था। कांग्रेस हाईकमान में उसकी पहुंच का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 2012 के विधानसभा चुनाव में प्रियंका वाड्रा ने उसके क्षेत्र में प्रचार किया था। वहीं, अलग-अलग चुनावी सभाओं में वो फिल्म स्टार्स ओर क्रिकेटरों के साथ भी प्रचार करता रहा है।

उसकी गिरफ्तारी के साथ ही यूपी की योगी सरकार ने एक करोड़ रुपये की डील मामले की जांच के लिए आदेश दे दिए हैं। जो कि एडीजी स्तर के अधिकारी करेंगे।
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इस तरह हुआ था मामले का खुलासा
मामले का खुलासा तब हुआ जब पंजाब पुलिस ने अपराधियों के नंबर सर्विलांस पर लिए। उनकी बातचीत में उक्त अधिकारी का नाम सामने आया है। सूत्रों की मानें तो वह आईपीएस अफसर लखनऊ में ही पुलिस की एक विंग में आईजी के पद पर तैनात है।

क्या है पूरा मामला
शाहजहांपुर से हिरासत में लिए गए नाभा जेल ब्रेक कांड के आरोपी गोपी घनश्यामपुरा को छुड़ाने के लिए एक अधिकारी पर रिश्वत देने का आरोप लगा। इस बड़े अधिकारी के साथ 45 लाख रुपये की डील हो चुकी थी। इसका खुलासा तब हुआ जब पंजाब में शराब कारोबारी रनधीप सिंह रिंपल व यूपी के अमनदीप सिंह और हरजिंदर सिंह से सामूहिक पूछताछ की गई। सूत्रों का कहना है कि पिंटू तिवारी के माध्यम से प्रदेश पुलिस के एक बड़े अफसर तक पैसे पहुंचाए जाने थे ताकि घनश्यामपुरा को छुड़ाकर पंजाब लाया जा सके।
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सूत्रों का कहना है कि जिस आईपीएस अधिकारी का नाम इस पूरे मामले में आ रहा है वह लखनऊ में ही पुलिस की एक विंग में आईजी के पद पर तैनात हैं। सूत्रों का कहना है कि यह आईजी के कई और कारनामे में भी सामने आ चुके हैं लेकिन अपने मातहतों को अपनी पहुंच की धौंस देने वाले इस अफसर के खिलाफ शिकायत की हिम्मत किसी की नहीं र्हुई। जब पंजाब पुलिस ने लिखा पढ़ी में शिकायत की तो पुलिस अफसरों के भी होश उड़ गए। लेकिन मामला लीक होने के बाद पुलिस अफसर भी इसे छिपा नहीं सके। (चुनाव प्रचार के दौरान प्रियंका वाड्रा के साथ संदीप तिवारी)

देर रात तलब किए गए डीजीपी और प्रमुख सचिव गृह
मामला जब उजागर हुआ तो देर रात मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रमुख सचिव गृह अरविंद कुमार और पुलिस महानिदेशक सुलखान सिंह को तलब किया। मुख्यमंत्री ने पूरे मामले की जांच एडीजी स्तर के अधिकारी से कराने के निर्देश दिए। प्रमुख सचिव गृह अरविंद कुमार ने बताया कि पंजाब के एक अपराधी को पकड़ने के बाद छोड़ने केलिए पैसे लेने के आरोप की जांच के लिए एडीजी स्तर के अधिकारी करेंगे।

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एटीएस के रडार पर सुल्तानपुर
एटीएस के सूत्रों की मानें तो संदीप तिवारी उर्फ पिंटू ने कई राज उगले हैं। इसी कड़ी में मंगलवार को लखीमपुर खीरी से भी दो युवकों को गिरफ्तार किया गया है। बताते हैं 90 के दशक में एक माफिया भी संदीप तिवारी की छत्रछाया में पनाह ले चुका है। संदीप तिवारी की गिरफ्तारी के बाद यूपी एटीएस ने संदीप के करीबियों पर पैनी नजर रखे है। एटीएस संदीप के बेहद करीब रहने वाले सुल्तानपुर जिले के लोगों की कुंडली खंगाल रही है। सूत्रों की मानें तो मंगलवार को भी एटीएस से जुड़े अधिकारी जिले में थे और शहर के शास्त्रीनगर, डिहवा और सिविल लाइन इलाके में जांच पड़ताल भी की। हालांकि जिले की पुलिस इस बात से इंकार करती रही। (अपने साथियों के साथ संदीप तिवारी)
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रोड शो में प्रियंका वाड्रा के साथ संदीप तिवारी।
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