शुक्रवार को तेंदुए की घेराबंदी बढ़ा दी गई। तीन पिंजड़े लगाए गए हैं और इलाके को तीन लेयर वाले जाल से घेर दिया गया है। रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू हुआ तो टीम को करीब 500-600 मीटर जाल की जरूरत पड़ी। लगभग 300 मीटर जाल पहले ही लगाया जा चुका था।
कुछ जाल एलडीए की यूनिटों से मंगाया गया। मेट्रो की दूसरी यूनिट से भी जाल मंगवाया गया। फिर भी कुछ मात्रा में जाल कम पड़ रहा था तो सेना से मदद मांगी गई। सेना के जवान और अफसर तुरंत जाल लेकर पहुंच गए। वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, ये जाल सुतली रस्सी से बुना था और 100 मीटर से कम लंबाई का था।
यही नहीं ड्रोन लेकर पहुंची पुलिस मैदान में ड्रोन उड़ा कर लोकेशन की भी तैयारी की, लेकिन तकनीकी कारणों के चलते वो पूरी तरह से लंबी उड़ान नहीं उड़ पाया। देर शाम तीनों पिंजड़ों के आसपास के इलाके को हरी और सफेद पन्नी से ढका गया, ताकि दृश्यता कम हो सके। इसकी सलाह मुंबई के संजय गांधी नेशनल पार्क के विशेषज्ञ डॉ. पीट ने दी थी।
जू प्रशासन ने इलाके में स्टाफ भी बढ़ा दिया है। टीम को लीड कर रहे डॉ. उत्कर्ष का साथ देने के लिे जू केदूसरे विशेषज्ञ डॉ. अशोक और दो जूनियर चिकित्सकों के अलावा कई और सपोर्ट स्टाफ भी बढ़ाए गए हैं। एक पिंजड़ा देर रात दो बजे के आसपास लगावाया गया, जबकि तीसरा पिंजड़ा सुबह लगवाया गया। तीनों ही पिंजड़ों में मुर्गी-पानी और गोश्त रखवाया गया।