लखनऊ विश्वविद्यालय के पुराने छात्र व भजन सम्राट अनूप जलोटा ने मंगलवार को शताब्दी समारोह के मंच से प्रस्तुतियां देनी शुरू कीं तो संगीत संध्या सुरमयी हो गई। उन्होंने आज भी मेरे मन में ध्यान में रहता विश्वविद्यालय, दुनिया देखी नहीं मिला लखनऊ विश्वविद्यालय... से आगाज किया।
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अनूप जलोटा
- फोटो : अमर उजाला
इसके बाद शुरू हुआ भजन, गीत और गजल का सिलसिला। अनूप जलोटा ने ऐसी लागी लगन... से माहौल को भक्तिमय बनाया तो अपने जवानी के दिनों में गुनगुनाने वाला गीत मैं शायर तो नहीं..., चिंगारी कोई भड़के...और दमादम मस्त कलंदर सुनाते हुए युवाओं को झूमने पर मजबूर कर दिया।
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कार्यक्रम के दौरान झूमे युवा
- फोटो : अमर उजाला
कार्यक्रम के दौरान वह विश्वविद्यालय में बिताए छात्र जीवन के संस्मरण भी सुनाते रहे। बताया कि मैं यहां पढ़ता तो था पर पढ़ाई में मन नहीं लगता था। इसलिए कैंटीन में बैठकर गाना गाता रहता था। अंग्रेजी बहुत मुश्किल लगती थी, इसलिए फिल्म बॉबी देखता था कि शायद उसे देखकर अंग्रेजी आ जाए, पर ऐसा हुआ नहीं। युवाओं को अपना मुरीद बनाने के बाद उन्होंने श्याम तेरी बंसी पुकारे राधा नाम...गाकर समारोह से विदा ली।
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मस्ती करते युवा
- फोटो : अमर उजाला
बताया सांस रोकने का राज... : अनूप जलोटा को भजन के दौरान लंबी सांस रोकते हुए गाने के लिए भी जाना जाता है। समारोह में ऐसी लागी लगन... भजन गाने के बाद उन्होंने एक बार फिर से अपनी कला से सभी को तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया।
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मस्ती करते युवा
- फोटो : अमर उजाला
इसके बाद उन्होंने बताया कि आज तक मैंने यह राज नहीं बताया कि इतनी सांस कैसे रोक लेता हूं। अपने परिसर पहुंचकर यह राज बताता दूं कि यह कमाल बाबा रामदेव से प्राणायाम सीखकर कर पाता हूं।
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डीजे नारायण
- फोटो : अमर उजाला
आंखों में तेरा ही चेहरा...से लूटी महफिल
शताब्दी समारोह के छठे दिन की संगीत संध्या में कला संकाय के प्रांगण में सुप्रसिद्ध गायक डीजे नारायण ने अपने आर्यन बैंड समूह के साथ युवाओं में जोश का संचार किया। शांतु दादा...,रोक सके न मुझको कोई...मैं तो नया सवेरा हूं...सात समुंदर पार से मैं चला मिटाने अंधेरा हूं...गीतों से शाम को जवां कर दिया।
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डीजे नारायण
- फोटो : अमर उजाला
डीजे नारायण ने बताया कि किस तरह वह इसी विवि परिसर से पढ़कर निकले। सरकारी सेवा के बाद अपना डीजे बैंड शुरू किया। इस मौके पर कुलपति प्रो. आलोक कुमार राय ने उनको सम्मानित किया।
बाबूजी के बाद डीजे ने भी फहराया झंडा...
अपने कार्यक्रम के दौरान डीजे नारायण ने हां मैं हिंदुस्तान हूं...गीत गाते हुए तिरंगा झंडा फहराया। उन्होंने बताया कि 83 साल पहले उनके बाबूजी ने भी यहां झंडा फहराया था। अंग्रेजी शासन के समय उनके पिता जय नारायण श्रीवास्तव ने वर्ष 1937 में जान हथेली पर रखकर कला प्रांगण में जाकर झंडा बदल दिया था। जय नारायण श्रीवास्तव वर्ष 1975 में लेबरकोर्ट से जज के रूप में सेवानिवृत्त हुए थे।