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प्यासी चंपाकली ने महावत का किया ये हाल, तस्वीरें...

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कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र के कतर्नियाघाट रेंज में पर्यटकों के भ्रमण और जंगल के गश्त के लिए हथिनी चंपाकली और जयमाला हैं। सोमवार रात में महावत उन्हें हैंडपंप से पानी पिला रहा था। इसी दौरान प्यासी चंपाकली पर्याप्त पानी न पाकर भड़क उठी। उसने हमला कर महावत को पटक दिया। उसके शरीर पर अपना पैर रख दिया। बचाने दौड़े सहयोगी को भी रौंद दिया। चीख सुनकर दौड़े वनकर्मियों ने किसी तरह हथिनी को काबू में किया।
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प्यासी चंपाकली ने महावत का किया ये हाल, तस्वीरें...

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देर रात सभी को लहूलुहान हालत में जिला अस्पताल पहुंचाकर भर्ती कराया गया है। हालत नाजुक बताई जा रही है। कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र के कतर्नियाघाट रेंज में वन विभाग हथिनी जयमाला और चंपाकली को जंगल गश्त और पर्यटकों के भ्रमण के लिए रखे हुए है। दिन भर दोनों हथिनियां कतर्नियाघाट रेंज में स्थित पर्यटक स्थल और नावघाट के पास रहती हैं।
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शाम को उन्हें गिरिजापुरी में स्थित हौदे पर ले जाया जाता है। प्रतिदिन की तरह महावत रामप्रसाद (55) अपने सहयोगी नजाकत अली (45) के साथ हथिनी चंपाकली को लेकर गिरिजापुरी स्थित हौदे पर पहुंचे। यहां पर हथिनी को बाल्टी से पानी पिलाने की शुरुआत हुई। लेकिन चंपाकली ज्यादा प्यासी थी। पर्याप्त पानी न मिलने से वह भड़क उठी। उसने महावत रामप्रसाद को सूंड में लपेटकर पटक दिया। फिर उस पर पैर रख दिया।

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चीख सुनकर दौड़े सहयोगी नजाकत अली ने हथिनी को काबू में करने की कोशिश की तो उस पर भी चंपाकली ने हमला कर सीने पर पैर रख दिया। जिससे नजाकत के मुंह से खून निकल आया। महावत और सहयोगी की चीख सुनकर दौड़े अन्य वनकर्मियों ने किसी तरह चंपाकली को काबू में किया।
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रात में ही दोनों वनकर्मियों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मिहींपुरवा पहुंचाया गया। वहां से डॉक्टरों ने उन्हें जिला अस्पताल रेफर कर दिया है। हालत काफी नाजुक है।
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हाथी को पानी पिलाने के लिए टंकी स्थापित है, हौज भी बना हुआ है। लेकिन व्यवस्थाएं बदहाल हैं। हौज में पानी ही नहीं है। बताया जा रहा है कि मोटर खराब होने के चलते टंकी का संचालन नहीं हो रहा है। ऐसे में महावत अरसे से हैंडपंप द्वारा बाल्टी भरकर हाथियों को पानी पिलाते हैं।
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