(अयोध्या)। नोटबंदी के चलते लोगों को हो रही परेशानियों को देखते हुए जहां कई बैंक बुजुर्गों के लिए अलग व्यवस्था कर रहे हैं, वहीं रामनगरी की यह खबर कुछ बैंकों की संवेदनशीलता पर सवाल उठाने वाली हैं। यहां खाते से रकम निकालने के लिए परिवारीजन अंतिम सांसे गिन रही महिला को खाट पर लेकर बैंक ऑफ बड़ौदा गए।
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बैंककर्मियों ने असहयोग किया तो लोगों ने हंगामा कर दिया तब जाकर बैंकवालों ने उनकी बात सुनी ओर खाते में रकम निकाल पाए। बाबू बाजार स्थित मौनी मंदिर निवासी शांती देवी (55) पत्नी राम सनेही वर्मा कई दिनों से गंभीर रूप से बीमार चल रही हैं। उसका खाता सब्जी मंडी के बगल स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा में है।
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राम सनेही का कहना है कि श्रीराम अस्पताल के चिकित्सक डॉ. एसके पाठक ने जवाब दे दिया और घर ले जाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि अंतिम समय में कुछ धरम-करम ही करवा दिया जाए, जिसके चलते बैंक गए। वहीं, कर्मचारियों व प्रबंधक ने उनकी बात नहीं सुनी और चारपाई समेत ग्राहक को बैंक लाने को कहा।
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मजबूरी में वे शांति को खाट समेत लेकर बैंक पहुंचे। इसके बावजूद बैंक प्रबंधन हीलाहवाली करता रहा। जिसको लेकर बैंक के बाहर कतार में खड़े लोग आक्रोशित होकर हंगामा करने लगे। लोगों की नाराजगी देख एक बैंक कर्मी ने विड्रॉल फॉर्म पर शांति का अंगूठा लगवाया।
अंगूठा लगवाने के बावजूद बैंक प्रबंधक अंतिम सांसें गिन रही शांति से बयान लेने की बात पर अड़े रहे। लोगों ने फिर हंगामा किया तो बैंक कर्मी ने बाहर आकर पूछताछ की। फिर खातें से साढ़े चार हजार रुपये निकालकर दिया। शाखा प्रबंधक सीबी चतुर्वेदी का कहना हे कि खाता धारक की पुष्टि तथा सहमति बिना रकम नहीं निकाली जा सकती।