दस महीने का निलंबन झेल चुके आईपीएस अमिताभ ठाकुर की मुश्किलें अभी पूरी तरह से खत्म नहीं हुई हैं। उनके खिलाफ अब दूसरी विभागीय कार्यवाही शुरू हो गई है।
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अमिताभ ठाकुर
- फोटो : amar ujala
यूपी शासन ने अब अमिताभ के खिलाफ मुख्यमंत्री आवास के सामने बैठने के संबंध में विभागीय जांच शुरू कर दी है।
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अमिताभ ठाकुर
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अमिताभ को दिए गए आरोपपत्र में कहा गया कि उन्होंने धारा 144 लगे होने के बावजूद दवाब बनाने के लिए मुख्यमंत्री आवास के सामने धरना-प्रदर्शन का कार्यक्रम बनाया और प्रेसवार्ता की।
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अमिताभ ठाकुर
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अमिताभ ठाकुर को 13 जुलाई 2015 को निलंबित किया गया था और मई में उनकी बहाली भी हो चुकी लेकिन उनके खिलाफ अनुशासनहीनता के 16 आरोपों के साथ जारी की गई विभागीय कार्यवाही अभी भी जारी है।
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अमिताभ ठाकुर
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प्रदेश सरकार ने उन्हें दस माह के निलंबन के बाद 11 मई को 11 अक्टूबर 2015 से पूरे वेतन के साथ बहाल कर दिया था।
मुख्यमंत्री आवास के सामने बैठने के संबंध में दिए गए आरोपपत्र को अमिताभ ने राजनीतिक द्वेष से प्रेरित बताकर अपना जवाब सामने रखने के लिए कुछ अभिलेखों की मांग की थी। शासन ने उन्हें अभिलेख देने से मना कर दिया और उन पर कैट और हाईकोर्ट में लगातार वाद दायर करने के आरोप में जांच के आदेश दिए। डीजी टेलिकॉम एकेडी द्विवेदी को जाँच अधिकारी नामित किया है।