शाह ने सीएए पर बात शुरू की तो पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में विभाजन के बाद घटती हिंदू, बौद्ध, जैन, पारसी, ईसाई और सिख आबादी का सवाल उठाते हुए इस समाज के लोगों को झकझोरने की कोशिश भी की। फिर यह कहते हुए कि इनकी आबादी घटने का मतलब है कि इन्हें धर्म बदलने पर मजबूर किया गया या इनकी महिलाओं, बहन और बेटियों को जबरन उठाया गया अथवा ‘ये भागकर भारत आ गए’ को भावनात्मक रूप से जोड़ा। यही नहीं, इन शरणार्थियों को नागरिकता देने को गांधी, नेहरू और इंदिरा गांधी की इच्छा से जोड़ते हुए सीएए पर राहुल गांधी व अखिलेश यादव को घेरा।