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CAA पर रैली कर एजेंडा सेट कर गए गृहमंत्री अमित शाह, राहुल-अखिलेश को चेतावनी भी दी

Wed, 22 Jan 2020 04:16 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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- फोटो : अमर उजाला
नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) पर भाजपा के जनजागरण अभियान के तहत लखनऊ में आयोजित रैली में अमित शाह पूरी तरह गृहमंत्री के रूप में दिखे। उन्होंने सीएए की सच्चाई समझाई तो नजरें भविष्य के एजेंडे पर भी टिकाए रखीं। राहुल, अखिलेश, मायावती और ममता सहित सभी विरोधियों को नसीहत व हिदायत ही नहीं दी, बल्कि यह चेतावनी भी दी कि कोई कुछ भी कर ले, पर सीएए वापस होने वाला नहीं है।
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- फोटो : अमर उजाला
शाह ने बात तो सीएए पर शुरू की, लेकिन राहुल पर पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान की भाषा बोलने का आरोप लगाते राष्ट्रवाद का रंग घोला तो सपा, बसपा व कांग्रेस को ‘आंख के अंधे व कान के बहरे’ बताते हुए कई तर्कों से कठघरे में खड़ा करते हुए अपने भाषण को हिंदुत्व के सरोकारों तक विस्तार दिया। शाह ने यह सावधानी भी बरती कि भाजपा के समीकरण तो मजबूत हों लेकिन विरोधी उनकी बात के सहारे हिंदू बनाम मुसलमान ध्रुवीकरण न कर सकें।
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- फोटो : अमर उजाला
शायद यही वजह रही कि शाह ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने, अयोध्या में तीन महीने में गगनचुंबी भव्य राम मंदिर निर्माण शुरू होने का उल्लेख करते हुए विरोधियों की भूमिका को कठघरे में खड़ा करने की कोशिश की। तीन तलाक का जिक्र कर मुस्लिम महिलाओं की संवेदनाओं को भी कुरेदा। कहा भी कि कांग्रेस, सपा और बसपा सिर्फ सीएए का ही विरोध नहीं कर रहे हैं बल्कि तीन तलाक, अनुच्छेद 370 व मंदिर का भी विरोध कर चुके हैं। इन्हें देशहित के हर काम पर विरोध है।

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- फोटो : अमर उजाला
उन्होंने अयोध्या में अब तक श्रीराम मंदिर न बनने और देश में आतंकवाद के लिए भी विरोधी दलों को जिम्मेदार ठहराया। शाह ने लोगों की भावनाओं के साथ खुद को खड़ा करने की कोशिश की कि कांग्रेस की तरफ से लगातार यह षड्यंत्र हुआ कि सर्वोच्च न्यायालय में अयोध्या मामले की सुनवाई पूरी होकर फैसले की नौबत ही न आए, पर मोदी सरकार के कारण सफल नहीं हो पाए।
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गृहमंत्री अमित शाह व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। - फोटो : अमर उजाला
योगी ने की शुरुआत : सीएए को मंदिर के सहारे राष्ट्रवाद के एजेंडे से जोड़ने की शुरुआत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने की। उन्होंने सीएए पर विपक्ष की भूमिका की तुलना द्रौपदी के चीरहरण पर कौरवों व उनके पक्ष में बैठे लोगों से करके राष्ट्रवाद को धार दी। फिर ‘जय श्रीराम’ के उद्घोष से रैली पर भगवा रंग चढ़ाया। अमित शाह ने अपने भाषण की समाप्ति पर अयोध्या में तीन महीने में भगवान राम का गगनचुंबी भव्य मंदिर बनने की शुरुआत होने का एलान कर और तीन बार ‘जय श्रीराम’ का जयघोष कर सीएए पर भगवा रंग को और चटख करने की कोशिश की।
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शाह के तेवर और हिंदुत्व के सहारे सीएए पर लामबंदी की कोशिश इसलिए भी खास है क्योंकि अयोध्या पर फैसले के बाद लखनऊ में शाह की यह पहली रैली थी। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद से औपचारिक रूप से हटने के बाद पूरी तरह गृहमंत्री के रूप में भी यह पहली सार्वजनिक सभा थी। उन्होंने मंदिर पर बात शुरू करने से पहले अवध और अयोध्या का जिक्र कर खुद भी लखनऊ की इस रैली के सियासी महत्व को बताने की कोशिश की।
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अखिलेश व राहुल पर निशाना, गांधी से इंदिरा तक सहारा
सीएए पर हिंदू बनाम मुसलमान ध्रुवीकरण न होने देने की कोशिश के चलते शाह ने फिर यह साफ किया कि सीएए में मुसलमानों सहित किसी की नागरिकता जाने वाली नहीं है। पर, ‘भारत तेरे टुकड़े हजार’ नारे लगाने वालों को जेल भेजने के फैसले का उल्लेख कर रैली में आए लोगों से भावनात्मक समर्थन हासिल कर शाह ने यह भी बताया कि देश को नुकसान पहुंचाने की सीमा तक इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। शाहबानो केस और तीन तलाक के फैसले का जिक्र कर इसे मुस्लिम महिलाओं की भावनाओं से जोड़ा और विपक्ष की नीति व नीयत पर हमला किया।
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शाह ने सीएए पर बात शुरू की तो पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में विभाजन के बाद घटती हिंदू, बौद्ध, जैन, पारसी, ईसाई और सिख आबादी का सवाल उठाते हुए इस समाज के लोगों को झकझोरने की कोशिश भी की। फिर यह कहते हुए कि इनकी आबादी घटने का मतलब है कि इन्हें धर्म बदलने पर मजबूर किया गया या इनकी महिलाओं, बहन और बेटियों को जबरन उठाया गया अथवा ‘ये भागकर भारत आ गए’ को भावनात्मक रूप से जोड़ा। यही नहीं, इन शरणार्थियों को नागरिकता देने को गांधी, नेहरू और इंदिरा गांधी की इच्छा से जोड़ते हुए सीएए पर राहुल गांधी व अखिलेश यादव को घेरा।
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