गोमती किनारे अमर उजाला और संस्कृति विभाग के ‘संगम संस्कृतियों का’ आयोजन में देशभर की संस्कृतियों का अनूठा संगम दिखा। लोकनृत्य, गीत-संगीत, विविध राज्यों के व्यंजन और किड्स जोन में ऊंट-घोड़े की सवारी ने दर्शकों को खूब आकर्षित किया।
लखनऊ में गोमती का किनारा और सर्दी की गुनगुनी धूप के बीच देशभर की संस्कृतियों का ऐसा अद्भुत संसार सजा कि देखने वाले भी मोहित हुए बिना नहीं रह सके।
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अमर उजाला संगम का आयोजन
- फोटो : शुभम बसंल
बंगाल से गुजरात और कश्मीर से उड़ीसा, राजस्थान, पंजाब, महाराष्ट्र, उत्तराखंड और केरल तक की संस्कृतियां एक ही प्रांगण में आकर ऐसे मिलीं कि पूरा भारत मानो एक ही जगह इकट्ठा हो गया हो।
सांस्कृतिक मंच पर कलाकारों की प्रस्तुतियों के साथ ही ओपन माइक के तहत अन्य कलाकारों और शहर के अलग-अलग विद्यालयों के छात्र-छात्राओं को भी अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिल रहा है।
जो अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों का मन मोह रहे हैं। गरबा और डांडिया के माध्यम से कलाकारों का जोश दिखा तो वहीं आल्हा, पुरबिहा गायन और बिरहा के साथ ही बीहू, जोहारी, भरतनाट्यम, कथक, बुंदेलखंडी व राई नृत्य ने सभी का दिल जीत लिया।
बच्चों के लिए अलग से किड्स जोन भी था, जिसमें नन्हे-मुन्नों ने रेलगाड़ी, ऊंट, घोड़ा और बग्घी की सवारी का आनंद उठाया। इसमें विभिन्न बोलियों के लोकगीतों की प्रस्तुतियों और भाव नृत्य ने लोगों को भावविभोर कर दिया।