बचपन वाली दिवाली, यानी हफ्तों पहले से साफ-सफाई, चूने के कनस्तर में नील मिलाना, दौड़भाग के घर का हर सामान लाना, बिजली की झालर छत पर लटकाना, दूर थोक की दुकान से पटाखे और धनतेरस पर कटोरदान लाना। खील से धान बिनवाना और थाल सजाकर घर-घर मिठाई व प्रसाद बांटना। घर की छत से दगे पटाखे हटाना....। ऐसी न जाने कितनी अनगिनत मीठी यादें सहेजे हैं हम और आप।