कैम्पस एंबेसडर।
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कैंपस में टीचर की डांट, दोस्तों का साथ चाहिए
घर और कैंपस के माहौल को लेकर बात छिड़ी तो विद्यार्थी बोले-जिनके यहां बंगले-कोठी हैं, उनके लिए तो एकांत मिलना आसान है, पर ज्यादातर के यहां अलग-अलग कमरे नहीं होते हैं। लोगों का आना-जाना, अभिभावकों की टोका-टोकी, बोले गए काम भी एकाग्रता कम करते हैं। अधिकतर युवाओं का कहना था कि घर कैद की तरह हो गया है। अब हमें शिक्षकों की डांट और दोस्तों का साथ चाहिए, क्योंकि उस माहौल में पढ़ने का मन करता है।
कैंपस एंबेसडर’ से आसान हुआ जवाब लेना
सर्वे के लिए कॉलेजों/विश्वविद्यालयों से एक-एक स्टूडेंट को लिया गया, जिन्हें ‘कैंपस एंबेसडर’ मानकर सवालों को बांट दिया गया। सभी ने एक निश्चित संख्या में स्टूडेंट्स से बात की और जवाब नोट किए। ये कैंपस एंबेसडर दुर्गेश त्रिपाठी, आदित्य पांडेय, आयुष द्विवेदी, मानवी शर्मा, विकास कुमार चौधरी, रश्मि सिंह, रितिका, पुष्पा यादव, सत्यम गुप्ता, अनुभव चौधरी, उत्कर्ष अवस्थी, भरत अग्रवाल, उज्जवल गुप्ता, अनुज कुमार सिंह, अराधना वर्मा, अभिनव चौधरी हैं।