राजनीति में नेताओं के पैर छूकर आगे बढ़ने की सोच लगभग हर पार्टी के नेताओं में दिखती है। पब्लिक रैलियों में ऐसे कई द्श्य सामने आ चुके हैं जब किसी नेता ने सार्वजनिक तौर पर अपने से वरिष्ठ नेता के पैर छुए। फिर वह चाहे उम्र में उनसे छोटा ही क्यों न रहा हो।
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राजनीति में 'पैर छूओ और आगे बढ़ो' सोच के कुछ नमूने
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इस मामले में मायावती सबसे बदनाम मानी जाती हैं। मायावती के विरोधी उन पर आरोप लगाते हैं कि मायावती चाहती हैं कि हर नेता सार्वजनिक तौर पर उनके पैर छुए। इसके कई उदाहरण देखने को भी मिले हैं।
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राजनीति में 'पैर छूओ और आगे बढ़ो' सोच के कुछ नमूने
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चुनाव के समय बिपक्षी पार्टियों के लोग ऐसे पोस्टर जारी करते हैं जिसमें सवर्ण प्रत्याशी मायावती के पैर छू रहा होता है। इसके अलावा वरिष्ठ आला अधिकारियों के द्वारा मायावती के पैर छूने की तस्वीरें सामने आती रही हैं।
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नेताओं के पैर छूने की परंपरा सिर्फ बसपा में ही नहीं दिखती। कांग्रेस पार्टी के कई नेताओं को सार्वजनिक तौर पर सोनिया गांधी के पैर छूते हुए देख गया है। मंत्रीमंडल विस्तार में तो यह एक जरूरी परंपरा सी दिखती है।
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कांग्रेस के अलावा भाजपा में भी पैर छूने की परंपरा है। यह इस बार के लोकसभा चुनाव में सबसे ज्यादा देखी गई। कई लोकसभा प्रत्याशियों ने चुनावी मंच पर नरेंद्र मोदी के पैर छुए।
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हालांकि पैर छूने का राजनीतिक इस्तेमाल नरेंद्र मोदी ने खुद भी किया है। नरेंद्र मोदी ने कई बार खुद से कथित तौर पर नाराज लालकृष्ण आडवाणी के पैर छुए। पैर छूने की यह फोटो खूब वाइरल हुई।
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समाजवादी पार्टी में भी पैर छूने का कल्चर नेताओं में देखा गया है। कई सार्वजनिक कार्यक्रम और सभाओं में नेता मुलायम सिंह यादव के साथ शिवपाल सिंह और राम गोपाल यादव के पैर छूते हुए देखे गए हैं।