चार साल की इस बच्ची के सिर में सिर के बराबर के ट्यूमर की खबर जब सीएम अखिलेश तक पहुंची तो वो पिघल गए। उन्होंने तुरंत इलाज के आदेश दे दिए।
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4 साल की बच्ची को अखिलेश ने दी नई जिंदगी
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सिर से जुड़ा सिर के बराबर ही ट्यूमर को अलग कर केजीएमयू के डॉक्टरों ने चार साल की बच्ची रेनू को नई जिंदगी दी है। इस सर्जरी में सबसे बड़ी समस्या थी ट्यूमर से जुड़ी वे नसें जो आंख के पास थीं। यानी थोड़ी-सी चूक रेनू की जिंदगी में अंधेरा भर सकती थी। करीब चार घंटे चली सर्जरी के बाद ट्यूमर को सिर से अलग किया जा सका। रेनू अब पूरी तरह से ठीक है। अब वह आसानी से किताबें पढ़ सकती है। ट्यूमर की वजह से उसकी आंख की रोशनी प्रभावित हो रही थी।
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बस्ती जिले के कुसरोत नवेरी घाट के झिनकान की सातवीं बेटी रेनू का जन्म हुआ तो उसके सिर के पिछले हिस्से में एक गांठ थी। मजदूर पिता इलाज कराने के लिए अस्पताल पहुंचे तो डॉक्टरों ने इतना खर्च बता दिया कि वह वापस घर लौट गए। धीरे-धीरे समय गुजरता गया और रेनू चार साल की हो गई।
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चार साल में यह ट्यूमर सिर के बराबर हो गया। इलाज के लिए दर-दर भटकने के दौरान किसी की नजर रेनू पर पड़ी तो मामला सोशल मीडिया के माध्यम से मुख्यमंत्री अखिलेश यादव तक जा पहुंचा। मुख्यमंत्री ने बच्ची के इलाज का आदेश दिया जिसके बाद उसे केजीएमयू में भर्ती कराया गया।
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ट्यूमर को निकालने वाले सर्जन डॉ. एसएन कुरील के मुताबिक मेडिकल की भाषा में इस ट्यूमर को ‘जॉइंट ऑसीपिटल इंसेफेलोसेल विद लिम्फोमा’ कहते हैं। यह बीमारी विटामिन की कमी से होती है। बहरहाल 21 दिसंबर को रेनू को केजीएमयू में भर्ती किया गया। प्रमुख जांचों के बाद सोमवार को सर्जरी प्लान हुई। पर, सर्जरी के दौरान पता चला कि ट्यूमर की नसें (ऑसीपिटल लोब) आंखों के पास थीं। सर्जरी में जरा-सी चूक होने पर आंखों की रोशनी जाना तय था। यही नहीं सिर की कई दूसरी नसें भी ट्यूमर से जुड़ी थीं।
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दोपहर बारह बजे सर्जरी शुरू हुई जो शाम चार बजे तक चली। डॉ. कुरील के मुताबिक ऑपरेशन के पूरा होने के कुछ समय बाद ही रेनू होश में थी और उसे किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं हुई। रेनू का कुछ समय तक केजीएमयू में इलाज चलेगा इसके बाद उसे डिस्चार्ज कर दिया जाएगा। सर्जरी सफल होने से खुश डॉ. कुरील ईश्वर का धन्यवाद देते हैं। वे कहते हैं भगवान ने उसका पूरा साथ दिया। सर्जरी के दौरान रेनू को न तो वेंटिलेटर की जरूरत पड़ी व न ही ब्लड की। सर्जरी जटिल होने के बाद भी किसी तरह की कोई खास परेशानी नहीं हुई।
ट्यूमर होने की वजह से परिवार रेनू को स्कूल नहीं भेजता था। ऑपरेशन के बाद रेनू ने अपनी मां से कहा- ‘अम्मा अब हम पढ़े जाइब’। ये बात सुन डॉ. कुरील ने रेनू को पहली बुक गिफ्ट की जिसके बाद रेनू उसे खिलौने की तरह पलट कर देखती है।