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स्ट्रेचर पर रखते समय गिरा नवजात बच्चा, कॉल करने पर भी नहीं आई एंबुलेंस, रिक्शे पर ही हो गई डिलीवरी

Fri, 15 Dec 2017 07:36 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के सरकारी दावों की पोल फिर खुल गई जब कई बार फोन मिलाने के बावजूद गर्भवती को एम्बुलेंस नहीं मिली। एक घंटे तक एम्बुलेंस की राह देखने के बाद परिवारीजन उसे ई-रिक्शा से अस्पताल ले जा रहे थे, तभी रास्ते में प्रसव हो गया। वहीं, रिक्‍शा से स्ट्रेचर पर रखते वक्त बच्चा स्टेचर पर गिर गया लेकिन अस्पताल में सही इलाज से अब जच्चा-बच्चा दोनों ठीक हैं।
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चिनहट की रहने वाली सादिया (28) को बृहस्पतिवार सुबह करीब 9:45 पर प्रसव पीड़ा शुरू हुई। इस पर परिवारीजनों ने एम्बुलेंस बुलाने के लिए 102 नंबर डॉयल किया। एम्बुलेंस के लिए इंतजार करने की बात कही गई। करीब एक घंटे तक परिवारीजन बार-बार फोन लगाते रहे लेकिन एंबुलेंस नहीं आई। इधर, गर्भवती की हालत बिगड़ने पर परिवारीजन उसे ई-रिक्शा से लोहिया अस्पताल ले जा रहे थे, तभी रास्ते में प्रसव हो गया। अस्पताल पहुंचने पर तुरंत महिला और उसके नवजात बच्चे को भर्ती कर लिया गया।
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मामले पर नेशनल एंबुलेंस सेवा के प्रवक्ता अजय यादव का कहना है कि चिनहट जैसे इलाके में एक घंटे तक एम्बुलेंस न मिलना संभव नहीं है। एम्बुलेंस समय पर क्यों नहीं पहुंची, इसकी जांच की जाएगी।
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जच्चा-बच्चा के लिए ये हैं सुविधाएं-
- गर्भवती को नि:शुल्क इलाज के लिए घर से अस्पताल ले जाना
- प्रसव के बाद जच्चा-बच्चा को अस्पताल से घर पहुंचाना
- गर्भवती व शिशु को बेहतर इलाज के लिए एक से दूसरे अस्पताल छोड़ना
- एक साल तक के शिशु को बीमारी होने पर घर से अस्पताल लाना और छोड़ना
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