माल के कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय की वार्डन साधना ने हैवानियत की हदें पार कर दीं। विद्यालय की छात्राओं को इतनी बेरहमी से पीटा कि उनके शरीर में सूजन आ गई। कड़कड़ाती ठंड में छात्राओं के कपड़े उतारकर मैदान में छोड़ दिया। वार्डन की हैवानियत की शिकार छात्राओं का दर्द बुधवार को शिक्षक-अभिभावक बैठक में फूटा तो हड़कंप मच गया। आक्रोशित अभिभावकों ने विद्यालय परिसर में जमकर हंगामा किया।
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वार्डन के खिलाफ कार्रवाई की मांग लेकर अभिभावक माल थाना पहुंच गए और थाने का घेराव कर धरना-प्रदर्शन किया। जानकारी पाकर शिक्षा विभाग के अधिकारी मौके पर आ गए। उन्होंने बीएसए प्रवीण मणि त्रिपाठी को मामले की जानकारी दी। बीएसए ने वार्डन को निलंबित कर जांच के आदेश दिए हैं। पुलिस ने पीड़ित अभिभावकों की तरफ से रिपोर्ट दर्ज कर ली है।
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पीड़ित छात्राओं ने बताया कि वार्डन पूरा दिन उनसे शिक्षकों के सामने गाली-गलौज करती हैं। ऐसे-ऐसे अपमानजनक अपशब्द कहती हैं कि शिक्षक भी शर्म से मुंह फेर लेते हैं। उनसे जबरन शौचालय की सफाई कराती हैं। मना करने पर बेरहमी से पिटाई की जाती है। छात्राओं को कड़ाके की ठंड में कपड़े उतरवाकर मैदान में छोड़ दिया जाता है। मैदान में पुरुष कर्मचारी भी मौजूद होते हैं।
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छात्राएं रोती-पीटती हैं लेकिन किसी की हिम्मत नहीं होती कि वार्डन के खिलाफ बोल सके। जो छात्राएं विरोध करती हैं उन्हें वार्डन के गुस्से का शिकार होना पड़ता है। खाने तक को तरसा दिया जाता है। छात्राओं ने बताया कि हर महीने की चार तारीख को शिक्षक-अभिभावक बैठक होती है।
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इस बार बैठक में वार्डन ने छात्राओं के अभिभावकों को भी प्रताड़ित करने की चेतावनी दी थी। बैठक के दौरान पिटाई की शिकार छात्राओं ने अभिभावकों को चोटों के निशान दिखाए तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। कक्षा सात की एक छात्रा ने बताया कि उसके कान का पर्दा फट गया है जबकि कक्षा सात की एक अन्य छात्रा ने पैरों में सूजन की बात कही।
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कक्षा छह की सात-आठ छात्राओं ने पिटाई की बात कही है। छात्राओं ने कहा कि विद्यालय में एक-एक पल उन्हें खौफ में बिताना पड़ रहा है। बच्चियों की हालत देखकर अभिभावक उग्र हो गए। उन्होंने पहले विद्यालय में हंगामा किया फिर माल थाना पहुंच गए। जानकारी पाकर आए खंड शिक्षा अधिकारी शिव प्रकाश सहित शिक्षा विभाग के अन्य अधिकारियों ने कार्रवाई का आश्वासन देकर उन्हें शांत कराया। अभिभावकों ने वार्डन के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई जबकि बीएसए ने वार्डन को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।
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नियमित निरीक्षण न होने से बिगड़ी सूरत
शिक्षा विभाग की ओर से परिषदीय विद्यालयों के साथ ही कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों के नियमित निरीक्षण का निर्देश है। आवासीय विद्यालय हर विकास खंड में सिर्फ एक ही एक है। इसके बावजूद जिम्मेदारों ने निरीक्षण में कोताही बरती। अगर नियमित रूप से निरीक्षण होता तो छात्राओं की शिकायत पहले ही सामने आ जाती और इतना बड़ा बवाल नहीं होता।
इस पर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी प्रवीण मणि त्रिपाठी का कहना है कि छात्राओं और अभिभावकों के आरोपों को देखते हुए वार्डन साधना को निलंबित कर दिया गया है। मामले की जांच के लिए दो सदस्यीय समिति गठित की गई है। आरोप सही पाए जाने पर वार्डन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।