वन स्टाफ सेंटर लखनऊ में तीन वर्षों में 2340 केस घरेलू हिंसा के आए, जिसमें 1738 को काउंसलिंग से सुलझा लिया गया। सुलझ चुके मामलों में से 58 पीड़िताओं ने फोन कर बताया कि लॉकडाउन में पति घर पर हैं और दिनभर झगड़ा करते हैं और बात-बात में पीट देते हैं। इसके बाद सेंटर ने खुद ही सभी सुलझे हुए मुकदमों का फॉलोअप लिया तो 476 और मामलों में मारपीट दोबारा शुरू होने का सच सामने आया। इनमें मध्यमवर्गीय परिवार के लोग भी हैं और हाई क्लास सोसाइटी की पीड़िताएं भी शामिल हैं।
न काम है न शराब मिल रही
वन स्टाफ सेंटर की प्रभारी अर्चना सिंह कहती हैं कि महिलाओं से हिंसा का कारण पूछने पर पता चलता है कि पति बेरोजगार है। पैसे का अभाव है। पहले नशा आसानी से करने को मिल जाता था, अब शराब नहीं मिल रही। महिलाएं कहती हैं कि इसका तनाव वे हमारे ऊपर निकाल रहे हैं। छोटी-छोटी बातों पर लड़ना चाहते हैं, उसे मुद्दा बना लेते हैं।
जिला प्रोबेशन अधिकारी सुधाकर शरण पांडेय ने बताया कि एक काउंसलिंग टीम का गठन किया गया है। यह टीम लगातार फॉलोअप लेगी और एप व वीडियो कॉल के लिए मुफीद सभी साधनों का इस्तेमाल कर दोनों पक्षों से बात करेगी और उनकी काउंसिलंग करेगी। हम लगातार फॉलोअप ले रहे हैं ताकि मामले सामने आएं और इन्हें रोकना संभव हो। काउंसलिंग टीम बुधवार से सक्रिय हो गई। जरूरत पर तुरंत 112 की मदद ली जाएगी।