करीब 10 साल पहले यूपी से रोजीरोटी के लिए पंजाब गया था। पहले मजदूरी की, फिर एक निजी कंपनी में जॉब मिल गई लेकिन इस लॉकडाउन ने मेरी सारी मेहनत पर पानी फेर दिया। गृहस्थी उजड़ सी गई और फाकों की नौबत आ गई। वापस लौट रहे हैं, लेकिन दोबारा जाकर वहां पर बस पाएंगे या नहीं, यह सोचकर सिहरन पैदा हो जाती है।
प्रतापगढ़ के रहने वाले अंकित ने अपनी आपबीती कुछ इन्हीं लफ्जों में बयां की। वह श्रमिक स्पेशल ट्रेन से चारबाग रेलवे स्टेशन पहुंचे थे, जहां पर थर्मल स्कैनिंग करने के बाद उन्हें घर रवाना कर दिया गया।
ऐसे ही बहराइच के रहने वाले अंशुल ने बताया कि लॉकडाउन के चलते उनके पास जो भी जमा पूंजी थी, खर्च हो गई। उन्होंने केरल से लखनऊ आने का प्रयास भी किया, पर पुलिस ने दबोच लिया। अब जब वहां से वापस लौटे हैं तो जेब खाली हो चुकी हैं और घर वापस जाकर क्या करेंगे, इसका भी पता नहीं।