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Yoga Tips: अल्जाइमर-डेमेंशिया के जोखिम से बचने के लिए करें ये तीन योगासन, इनके और भी कई लाभ

Sat, 31 Dec 2022 02:30 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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अल्जाइमर रोग की समस्या और बचाव के उपाय - फोटो : iStock
पिछले कुछ वर्षों के आंकड़े उठाकर देखें तो पता चलता है कि तंत्रिकाओं से संबंधित जिन विकारों के मामले सबसे ज्यादा बढ़े हैं, अल्जाइमर रोग उनमें से एक हैं। मस्तिष्क के सिकुड़ने (एट्रोफी) के कारण यह समस्या होती है, उम्र बढ़ने के साथ इस रोग के जोखिम भी बढ़ जाते हैं। अल्जाइमर रोग को डेमेंशिया के सबसे आम कारणों में से एक माना जाता है। डेमेंशिया में सोच, व्यवहार और सामाजिक कौशल की क्षमता काफी कम हो जाती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं कि जीवनशैली को स्वस्थ रखने के उपाय करके तंत्रिकाओं से संबंधित इन विकारों के जोखिम को कम किया जा सकता है।

ब्लड प्रेशर और शुगर के लेवल को कंट्रोल करने के साथ स्वस्थ आहार और नियमित योग-व्यायाम की आदत आपको इस तरह की समस्याओं से बचाने में मददगार हो सकती है। सभी उम्र के लोगों को दिनचर्या में योग-व्यायाम को जरूर शामिल करना चाहिए जिससे इस प्रकार की बीमारियों के खतरे को कम किया जा सके।

आइए जानते हैं कि किस प्रकार के योगासनों के अभ्यास की आदत बनाना आपको अल्जाइमर-डेमेंशिया के जोखिम से बचाने में मददगार हो सकता है?
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प्राणायाम से कई प्रकार के लाभ - फोटो : istock
उज्जायी प्राणायाम से मिलता है लाभ

मन को शांत करने और तंत्रिकाओं को आराम देने में जिन योगासनों के अभ्यास को सबसे कारगर माना जाता है, प्राणायाम उनमें से एक हैं। कुछ प्रकार के प्राणायाम को दिनचर्या में शामिल करके अल्जाइमर-डेमेंशिया के जोखिम को काफी कम किया जा सकता है। प्राणायाम में सांस पर ध्यान केंद्रित करना होता है जिससे एकाग्रता बढ़ती है और तंत्रिकाओं को आराम मिलता है। इसके लिए उज्जायी प्राणायाम और कपालभाति के अभ्यास की आदत बनाई जा सकती है।
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वज्रासन योग से होने वाले लाभ - फोटो : iStock
वज्रासन योग को करें दिनचर्या में शामिल

वज्रासन योग के अभ्यास की आदत न केवल मन को शांत और स्थिर रखने में मदद करता है बल्कि पाचन अम्लता और गैस जैसी समस्याओं को दूर करने में भी इसके लाभ देखे गए हैं। वज्रासन योग आसान है और इसे सभी उम्र के लोग आसानी से करके लाभ पा सकते हैं। अल्जाइमर के खतरे से बचाने के लिए इस योग का अभ्यास मददगार हो सकता है। जांघ की मांसपेशियों को मजबूत बनाने और पीठ दर्द से राहत दिलाने में भी इस योग के विशेष लाभ हैं।
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पश्चिमोत्तानासन योग से होने वाले फायदे - फोटो : Pixabay
पश्चिमोत्तानासन योग का करें अभ्यास

पश्चिमोत्तानासन योग को पेट कम करने और मधुमेह से पीड़ित लोगों के लिए बहुत प्रभावी माना जाता रहा है, इसके तंत्रिकाओं से संबंधित विकारों में भी विशेष लाभ पाया जा सकता है। यह योग मन को शांत करता और सिर में रक्त के प्रवाह को बढ़ाने में भी मदद करता है, जिससे दिमाग को आराम मिलता है और अनिद्रा, अवसाद और चिंता कम होती है। ये स्थितियां अल्जाइमर-डेमेंशिया के खतरे को बढ़ाने वाली मानी जाती रही हैं।



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नोट: यह लेख योगगुरु के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। आसन की सही स्थिति के बारे में जानने के लिए किसी विशेषज्ञ से संपर्क कर सकते हैं।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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