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Yoga Tips: रीढ़ की दिक्कतों के कारण सामान्य कामकाज करना हो सकता है कठिन, इन योगासनों के अभ्यास से मिलेगा लाभ

Sat, 04 Jun 2022 11:25 AM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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रीढ़ की हड्डी के लिए योग - फोटो : iStock
शरीर को सीधा रखने, झुकने और दैनिक जीवन के अन्य आवश्यक कार्यों को करते रहने के लिए रीढ़ की हड्डी का स्वस्थ रहना बहुत आवश्यक माना जाता है। हालांकि गड़बड़ लाइफस्टाइल के चलते पिछले कुछ वर्षों में रीढ़ की हड्डी से संबंधित समस्याओं के मामले काफी बढ़ गए हैं। विशेषज्ञ इसके लिए सेंडेंटरी लाइफस्टाइल को प्रमुख कारक के तौर पर देखते हैं। सेंडेंटरी लाइफस्टाइल यानी कि जीवनशैली की गतिहीनता आपमें कई तरह के स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिम को बढ़ा सकती है। रीढ़ की हड्डी की समस्या भी इसका एक उदाहरण है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आप दिनचर्या में रोजाना योगासनों को शामिल करते हैं तो हड्डी और मांसपेशियों को स्वस्थ बनाए रखने में मदद मिल सकती है। वहीं जो लोग पहले से ही रीढ़ की समस्याओं के शिकार हैं उनके लिए योगासनों का अभ्यास करना विशेष लाभप्रद हो सकता है। आइए जानते हैं कि दिनचर्या में किन योगासनों को शामिल करने की आदत आपके लिए फायदेमंद हो सकती है?
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भुजंगासन योग के लाभ - फोटो : Istock
भुजंगासन योग

रीढ़ की स्ट्रेचिंग के साथ लचीलेपन को बढ़ाने और कमर-गर्दन के दर्द को कम करने के लिए भुजंगासन योग के अभ्यास की आदत आपके लिए विशेष लाभप्रद होती है। भुजंगासन योग को विशेषज्ञ शरीर के पिछले हिस्से के अंगों के लिए काफी फायदेमंद अभ्यास के तौर पर देखते हैं। आपकी छाती, कंधे और पेट की मांसपेशियों के बेहतर स्ट्रेचिंग और स्वास्थ्य को बढ़ाने के लिए इसका नियमित अभ्यास किया जाना चाहिए। शारीरिक स्वास्थ्य के साथ भुजंगासन योग आपके मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी काफी कारगर योगाभ्यास माना जाता है। 
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cat pose मार्जरी आसन - फोटो : istock
कैट काऊ पोज का अभ्यास

कैट काऊ पोज या मार्जरी आसन को रीढ़ की समस्याओं में काफी फायदेमंद माना जाता है। रीढ़ की हड्डी को मजबूत बनाने से लेकर लचीलेपन को बढ़ाने और रक्त के संचार को ठीक बनाए रखने के लिए रोजाना इस योग का अभ्यास करना आपके लिए फायदेमंद हो सकता है। मार्जरी आसन आपके धड़, कंधे और गर्दन की बेहतर स्ट्रेचिंग करने के साथ शरीर में रक्त परिसंचरण में सुधार करने में आपके लिए लाभकारी है। 
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अधोमुख शवासन से रीढ़ को लाभ - फोटो : iStock
अधोमुख शवासन योग

पीठ, कमर और रीढ़ से संबंधित दिक्कतों को दूर करने के लिए विशेषज्ञ अधोमुख शवासन योग के नियमित अभ्यास की आदत को लाभदायक मानते हैं। डाउनवर्ड फेसिंग डाग पोज रीढ़ के लचीलेपन को बढ़ाने और कमर की समस्याओं को दूर करने में आपके लिए विशेष लाभप्रद हो सकता है। सेंडेंटरी लाइफस्टाइल के कारण लोगों में शरीरिक असंतुलन काफी बढ़ गया है, ऐसे में इस योग के नियमित अभ्यास की आदत समस्याओं को दूर करने में आपके लिए सहायक हो सकती है। 


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नोट: यह लेख योगगुरु के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। आसन की सही स्थिति के बारे में जानने के लिए किसी विशेषज्ञ से संपर्क कर सकते हैं।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
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