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World Malaria Day 2023: मलेरिया से जल्द स्वस्थ होने के लिए रोजाना करें इन योगासनों का अभ्यास, कमजोरी होगी दूर

Tue, 25 Apr 2023 10:15 AM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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मलेरिया से रिकवरी के लिए योग - फोटो : iStock
World Malaria Day 2023: विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, मलेरिया एक जानलेवा बीमारी है, जो संक्रमित मादा एनोफिलीज मच्छरों के काटने से फैलता है। बच्चों में मलेरिया की गंभीर स्थिति जानलेवा हो सकती है। सामान्यत: मलेरिया वातावरण में नमी या बरसात के मौसम में जमा पानी के कारण होता है। नमी के कारण संक्रमण और बैक्टीरिया के पनपने के लिए यह सबसे उपयुक्त परिस्थिति हो सकती है। मलेरिया के मच्छर के काटने पर कुछ सामान्य लक्षण दिखते हैं, जिसमें बुखार, सिर दर्द, उल्टी आना, ठंड लगना, थकान होना, चक्कर आना और पेट में दर्द हो सकता है। मलेरिया के इलाज के लिए करीब दो सप्ताह तक दवाइयां चलती हैं। हालांकि मलेरिया के इलाज के बाद भी कमजोरी और थकान रहती है। बीमारी के बाद रिकवरी में समय लगता है।

योग विशेषज्ञ रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और बीमारि से जल्द रिकवरी के लिए योगासनों के अभ्यास की सलाह देते हैं। यहां कुछ योगासनों के बारे में बताया जा रहा है, जिनका डेंगू या मलेरिया के बाद तेज रिकवरी के लिए अभ्यास कर सकते हैं।
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सिद्धा वाॅक - फोटो : iStock
सिद्धा वाॅक

ध्यान पूर्वक टहलने को सिद्धा वाॅक का नाम दिया गया। सिद्धा वाॅक को 8 वाॅकिंग के नाम से भी जाना जाता है। फिट रहने और वजन कम करने के लिए लोग वाॅक करते हैं। वाॅक मन और मस्तिष्क को शांत कर सकता है। सिद्धा वाॅक से सेहत को कई लाभ मिल सकते हैं। आप घर पर कमरे में, छत पर या बागीचे में इसे कर सकते हैं। आमतौर पर सिद्धा वाॅक को योग से जोड़ा जाता है, क्योंकि ये वाॅकिंग के साथ ही मेडिटेशन का काम करता है।

सिद्धा वाॅक 8 के शेप में होती है, जिसमें दक्षिण से उत्तर दिशा में लगभग 6 फीट के दो गोले होते हैं। दोनों गोलों के बीच लगातार वाॅक करना होता है। इस दौरान मन को शांत रखना होता है। पेट पूरी तरह से खाली होना चाहिए और नंगे पैर वाॅक करनी चाहिए।
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Vajrasana - फोटो : istock
वज्रासन योग

वज्रासन योग पाचन तंत्र को तुरुस्त रखता है, मन को शांत करता है। नींद और ब्लड प्रेशर की परेशानी को कम करने के साथ ही इम्यूनिटी मजबूत करता है। इस आसन को करने के लिए घुटनों को टेककर बैठ जाएं। पीठ सीधी रखते हुए एड़ियों के बीच गैप में कूल्हों को टिका लें। अब दोनों हाथों को गोद में रखते हुए कुछ देर इसी मुद्रा में बैठे रहें।

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shakti mudra - फोटो : pixabay
शक्ति मुद्रा

मौसम में बदलाव या डेंगू-मलेरिया के कारण होने वाले सर्दी-जुकाम और बुखार की समस्या से राहत पाने के लिए शक्ति मुद्रा फायदेमंद है। अस्थमा के रोगियों के साथ ही प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने के लिए शक्ति मुद्रा का अभ्यास करना चाहिए। इस मुद्रा के अभ्यास के लिए सबसे पहले दोनों हाथों के अंगूठों को शेष उंगलियों के बीच दबाकर मुट्ठी बना लें। अब नाभि के नीचे पेट पर हल्के से हाथ रखें। दोनों मुट्ठियों के बाच दो इंच का अंतर हो। लंबी, गहरी और धीमी श्वास लेते हुए दिन में दो तीन बार इसका अभ्यास कर सकते हैं।
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भस्त्रिका प्राणायाम - फोटो : अमर उजाला
भस्त्रिका प्राणायाम

यह प्राणायाम शरीर के विषाक्त पदार्थों को खत्म करता है और फेफड़ों में कार्बन डाइऑक्साइड के स्तर को कम कर सकता है। इसके अभ्यास से गले की सूजन और कफ भी कम हो सकता है। 

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नोट: यह लेख योग गुरु के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। आसन की सही स्थिति के बारे में जानने के लिए किसी विशेषज्ञ से संपर्क कर सकते हैं।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
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