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World Asthma Day 2025: अस्थमा के मरीजों को रोज करना चाहिए इन योगासनों का अभ्यास, श्वास की समस्या होगी ठीक

Tue, 06 May 2025 10:48 AM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला

सार

World Asthma Day 2025 अस्थमा के कारण सांस लेते समय खांसी-घरघराहट और सीने में जकड़न जैसी दिक्कत होने लगती है। श्वसन रोग विशेषज्ञ कहते हैं, जिन लोगों को अस्थमा की समस्या है उन्हें निरंतर इसके जोखिम कारकों से बचाव करते रहने के लिए उपाय करते रहना चाहिए।
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अस्थमा के मरीजों के लिए योग - फोटो : Freepik
World Asthma Day 2025: अस्थमा दीर्घकालीन श्वसन रोग है, जो शरीर के वायुमार्ग प्रभावित करता है। इसके कारण सांस लेने में समस्या हो सकती है। अस्थमा के रोगियों के वायुमार्ग बेहद संवेदनशील होते हैं और गर्मी-सर्दी जैसे माहौल में इनमें सूजन की समस्या बढ़ जाती है। अस्थमा के कारण सांस लेते समय खांसी-घरघराहट और सीने में जकड़न जैसी दिक्कत होने लगती है। श्वसन रोग विशेषज्ञ कहते हैं, जिन लोगों को अस्थमा की समस्या है उन्हें निरंतर इसके जोखिम कारकों से बचाव करते रहने के लिए उपाय करते रहना चाहिए।

अस्थमा के लक्षण
  • सांस लेने में तकलीफ
  • बार-बार खांसी आना 
  • छाती में जकड़न 
  • सांस लेने के दौरान सीटी जैसी आवाज
  • जल्दी थकान महसूस होना
अगर इन लक्षणों की अनदेखी की जाए या सही इलाज न हो तो यह स्थिति जानलेवा भी हो सकती है।

योग न केवल फेफड़ों की कार्यक्षमता को बेहतर बनाता है, बल्कि श्वसन तंत्र की मजबूती, तनाव में कमी और प्रतिरक्षा तंत्र को भी मजबूत करता है। योग अस्थमा के लक्षणों को कम कर सकता है। नियमित सही तरीके से किए गए योगासनों से फेफड़ों की शक्ति बढ़ती है। योग श्वसन मार्गों की सफाई में मदद करता है। तनाव और चिंता कम करता है। योग से सांस लेने की तकनीक में सुधार होता है। इम्यूनिटी मजबूत होती है। आइए जानते हैं अस्थमा मरीजों के लिए प्रभावी योगासनों के बारे में। 
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भुजंगासन - फोटो : Freepik
भुजंगासन

यह आसन श्वास लेने की क्षमता को बढ़ाता है और फेफड़ों को मजबूत बनाता है। साथ ही प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत होती है। भुजंगासन के अभ्यास के लिए पेट के बल लेटकर हथेली को कंधे के नीचे रखें और सांस लेते हुए शरीर के आगे के भाग को ऊपर की ओर उठाएं। इस मुद्रा में 10-20 सेकेंड्स रहें, फिर सांस छोड़ते हुए सामान्य अवस्था में आ जाएं। इस अभ्यास को नियमित रूप से 10-15 बार किया जा सकता है।


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सेतुबंधासन - फोटो : Adobe
सेतुबंधासन

इस आसन के अभ्यास से सांस लेने की प्रक्रिया में सुधार होता है और फेफड़े खुलते हैं। अस्थमा से परेशान लोगों के लिए सेतुबंधासन का अभ्यास फायदेमंद होता है। सेतुबंधासन के अभ्यास के लिए पीठ के बल लेटकर पैरों को कंधे की चौड़ाई से अलग करते हुए घुटनों को मोड़ लें। अब हथेलियों को खोलते हुए हाथ जमीन में बिल्कुल सीधा सटा लें। सांस लेते हुए कमर के हिस्से को ऊपर की ओर उठाएं। इस दौरान कंधे और सिर को सपाट जमीन पर रखें। फिर सांस छोड़ते हुए पुरानी स्थिति में आ जाएं।

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कपालभाति प्राणायाम - फोटो : Amar Ujala
कपालभाति प्राणायाम

प्राणायाम सांस की समस्याओं से राहत देने में मदद करता है और शरीर में ऑक्सीजन के स्तर को बढ़ाता है। इस आसन के अभ्यास के लिए पद्मासन में बैठें और अपनी कमर सीधी रखें। गहरी सांस लेते हुए तेजी से पेट को अंदर करें और सांस को छोड़ें। लगातार दो से तीन मिनट तक इस आसन को दोहराएं।

 
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प्राणायाम - फोटो : Freepik.com
नोट: यह लेख योगगुरु के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। आसन की सही स्थिति के बारे में जानने के लिए किसी योगगुरु से संपर्क कर सकते हैं।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
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