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Yoga Tips: सूर्य नमस्कार का अभ्यास करते समय भूलकर भी न करें ये पांच गलतियां, जानें सही तरीका और फायदा

Fri, 25 Aug 2023 11:42 AM IST
शिवानी अवस्थी हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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साल 2022 में संक्रमण से दूर रहने के लिए करें ये योग - फोटो : Pixabay
Yoga Tips: मानसिक और शारीरिक सेहत को बेहतर बनाए रखने के लिए नियमित योगाभ्यास लाभदायक होता है। योग के कई फायदे हैं। योग का प्रतिदिन अभ्यास करने से कई तरह की बीमारियों से तो राहत मिलती ही हैं, मानसिक आराम भी मिलता है। लेकिन अक्सर लोग योगाभ्यास करते समय कुछ सामान्य गलतियां कर जाते हैं। जिनका शरीर पर गलत असर पड़ सकता है। ऐसे में आपको पता होना चाहिए कि किसी योगासन को करने का सही तरीका क्या है। वैसे तो कई सारे अलग अलग योगासन हैं, लेकिन इनमें सूर्य नमस्कार बेसिक और पहले चरण का योगाभ्यास है। सूर्य नमस्कार के अभ्यास के लिए न तो आपको किसी उपकरण की जरूरत होती है, न ही जगह या समय की सीमा होती है। हालांकि इसे सूर्योदय के समय करना फायदेमंद हो सकता है। सही तरीके से सूर्य नमस्कार का अभ्यास करने से सेहत को अनगिनत फायदे मिल सकते हैं। चलिए जानते हैं कि सूर्य नमस्कार के क्या फायदे हैं, सूर्य नमस्कार करने का सही तरीका और सूर्य नमस्कार का अभ्यास करते समय किन गलतियों को करने के बचना चाहिए। 
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सूर्य नमस्कार के फायदे - फोटो : iStock
सूर्य नमस्कार के फायदे

सूर्य नमस्कार का अर्थ इसके नाम से ही स्पष्ट है। ऐसा आसन जिसमें सूर्य को नमस्कार करना हो। सूर्य नमस्कार के अंतर्गत 12 अलग अलग योगासनों का अभ्यास किया जाता है। जितने अधिक सूर्य नमस्कार के आसन बिना रुके आप करते हैं, उतनी ज्यादा कैलोरी बर्न होती है। इस आसन को करने से शरीर में अतिरिक्त चर्बी कम होती है और वजन नियंत्रित होता है।

जिन लोगों को वजन कम करना है, उन्हें सबसे पहले सूर्य नमस्कार के अभ्यास को करना चाहिए। एक रिपोर्ट के मुताबिक सूर्य नमस्कार करने से शरीर की जितनी कैलोरी बर्न होती है, उतनी रनिंग, साइकलिंग, किसी स्पोर्ट्स, वेटलिफ्टिंग या किसी अन्य वर्क आउट से भी नहीं होती। सूर्य नमस्कार के जितने ज्यादा सेट आप करेंगे,उतनी कैलोरी को आसानी से बर्न कर सकते हैं।
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सूर्य नमस्कार करते समय न करें ये गलतियां - फोटो : Pixabay
सूर्य नमस्कार करते समय न करें ये गलतियां

सांस लेने की गलत तकनीक

सूर्य नमस्कार सांस पर आधारित योगासन हैं। इसका अभ्यास करते समय शरीर की गतिविधियों के साथ आपकी सांसों का तालमेल होना चाहिए। लेकिन अक्सर लोग श्वसन तकनीक का सही तरीके से पालन नहीं करते।

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हस्त उत्तानासन न करना - फोटो : Pixabay
हस्त उत्तानासन न करना

सूर्य नमस्कार के 12 आसनों में एक हस्त उत्तानासन हैं, जिसे एक राउंड में दो बार किया जाता है। इस आसन से रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है। लेकिन योगाभ्यास करने वाले हस्त उत्तानासन को छोड़ देते हैं, जिससे उनकी सांस और गति के बीच संतुलन टूट जाता है।
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चतुरंग दंडासन में गलतियां - फोटो : istock
चतुरंग दंडासन में गलतियां

सूर्य नमस्कार करते समय चतुरंग दंडासन किया जाता है। जिसमें शरीर को हथेलियों या पैर की उंगलियों के सहारे सीधा और जमीन के बराबर रखा जाना चाहिए। लेकिन लोग इस आसन को करते समय अक्सर ही गलती करते हैं। इससे उनकी निचली रीढ़ पर दबाव बनता है। जब योगी का निचला शरीर फर्श पर झुक जाता है तो उनको पीठ दर्द की समस्या होने लगती है।
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दो आसनों के बीच भ्रम - फोटो : Istock
दो आसनों के बीच भ्रम

कई लोगों को भुजंगासन और ऊर्ध्वमुख श्वानासन के बीच का फर्क नहीं पता। उन्हें लगता है कि कोबरा पोज और अपवर्ड फेसिंग डॉग पोज एक ही है। जिसे वह समान  तरीके से करते हैं। लेकिन दोनों पूरी तरह से अलग हैं। दोनों को करने के सही तरीकों में अंतर को समझ कर अभ्यास करना चाहिए।
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सूर्य नमस्कार - फोटो : pixabay
सूर्य नमस्कार करने का सही तरीका

सबसे पहले मैट पर प्रणामासन की मुद्रा में खड़े हो जाएं। फिर सांस खींचते हुए उत्तानासन की अवस्था में आ जाएं। सांस छोड़ें और हस्तपादासन की मुद्रा बना लें। पुन: सांस खींचते हुए अश्व संचालनासन की स्थिति में आ जाएं। दंडासन की मुद्रा में आते हुए सांस छोड़ें। कुछ देर इसी अवस्था में सांस रोककर रहें। फिर सांस खींचते हुए अष्टांग नमस्कार करें। सांस को छोड़ते हुए भुंजगासन का स्थिति में आ जाएं। सांस खींचते हुए अधोमुख श्वानासन की मुद्रा में आ जाएं। अब सांस को इसी तरह सिंक में रखते हुए अश्व संचालनासन की मुद्रा में आएं। हस्तपादासन करें, उसके बाद हस्त उत्तानासन करते समय सांस छोड़ें। सांस खींचते हुए ताड़ासन की मुद्रा में आ जाएं।
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नोट: यह लेख योग विशेषज्ञों के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। आसन की सही स्थिति के बारे में जानने के लिए किसी योगगुरु से संपर्क कर सकते हैं।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
 
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