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Yoga Tips: क्यों होती है साइनोसाइटिस? विशेषज्ञों ने बताया- इन योगासनों के अभ्यास से पा सकते हैं इसमें आराम

Fri, 04 Nov 2022 12:03 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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छींक आते रहना साइनस को हो सकता है संकेत - फोटो : Pixabay
लगातार छींक आते रहना, नाक बंद होने के कारण सांस लेने में दिक्कत महसूस होने जैसे लक्षण साइनोसाइटिस का संकेत हो सकते हैं। यह काफी असहज कर देने वाली स्थिति मानी जाती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, हमारी नाक और सिर के बीच कुछ स्थान रिक्त होता है, इसमें सूजन आ जाने की स्थिति साइनोसाइटिस की समस्या का कारण बन सकती है। सूजन की यह समस्या कुछ लोगों में कई महीनों तक भी बनी रह सकती है।

साइनोसाइटिस की स्थिति में लगातार छींक आते रहने और सांस लेने में तकलीफ की समस्या हो सकती है। जिन लोगों को यह समस्या होती है उन्हें विशेष बचाव करते रहने की सलाह दी जाती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, श्वसन तंत्र के संक्रमण, एलर्जी या फिर नाक में ऊतकों के बढ़ जाने के कारण इस तरह की दिक्कत हो सकती है। साइनस संक्रमण के बढ़ने की स्थिति में आंखों के लिए भी दिक्कतें बढ़ सकती हैं, यही कारण है कि जिन लोगों को साइनस की समस्या है उन्हें विशेष बचाव करते रहने की सलाह दी जाती है। योग के माध्यम से भी इस समस्या के लक्षणों को कम करने में मदद मिल सकती है। आइए जानते हैं कि किन योगासनों को साइनस की दिक्कत में लाभकारी माना जाता है?
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अधोमुख शवासन से साइनस में लाभ - फोटो : Pixabay
अधोमुख शवासन योग से पा सकते हैं आराम

अधोमुख शवासन योग कई प्रकार से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में लाभकारी हो सकता है। योग विशेषज्ञ कहते हैं साइनोसाइटिस की समस्या से परेशान लोगों को इस योग से विशेष लाभ मिलता है। रक्त परिसंचरण को सुधारने, अवरुद्ध चैनलों को खोलने और पूरे शरीर के तनाव को दूर करने में इस योग के नियमित अभ्यास के लाभ देखे गए हैं। यह न केवल गर्दन की स्ट्रेचिंग करता है साथ ही नेजल कैविटी को भी कम करता है, ऐसे में इसे साइनस से राहत पाने वाले अभ्यास के तौर पर जाना जाता है।
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शलभासन योग से भी साइनस में लाभ - फोटो : istock
शलभासन योग का करिए अभ्यास

शलभासन योग  हाथों, जांघों, पैरों और छाती को मजबूती प्रदान करने वाले योगाभ्यास के तौर पर जाना जाता है। विशेषज्ञ इसे "मदर ऑफ़ ऑल पोज़" के रूप में वर्णित करते हैं। यह पोज़ नसों को आराम देने और मन को शांत करने के लिए बेहद फायदेमंद है। यह न केवल साइनोसाइटिस और अन्य एलर्जी की स्थिति से राहत प्रदान करता है, बल्कि अनिद्रा और चिड़चिड़ापन को भी कम करता है। फेफड़ों में रक्त के प्रवाह को ठीक करके शरीर को संक्रमण से बचाने में भी इस योग के लाभ देखे गए हैं।
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साइनस की समस्या में कौन से योगाभ्यास करें? - फोटो : istock
मत्स्यासन योग से पा सकते हैं आराम

मत्स्यासन योग, फेफड़ों और सांस की समस्याओं को दूर करने वाले सबसे प्रभावी योगाभ्यासों में से एक है। फेफड़ों की मांसपेशियों की स्ट्रेचिंग के साथ यह गहरी सांस लेने को बढ़ावा देने वाला आसन है। साइनोसाइटिस से राहत प्रदान करने के लिए यह छाती और गले के भीतर के अवरुद्ध चैनलों को खोलता है।

एलर्जी की स्थिति से राहत दिलाने, रक्त परिसंचरण को बढ़ाने और समग्र प्रतिरक्षा प्रणाली में सुधार करने में इस योगासन के लाभ देखे गए हैं। 



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नोट: यह लेख योग विशेषज्ञों के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। आसन की सही स्थिति के बारे में जानने के लिए किसी योगगुरु से संपर्क कर सकते हैं।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
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