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Yoga Tips: इस अभ्यास को विशेषज्ञ मानते हैं 'किंग्स ऑफ ऑल योग', संपूर्ण शरीर की समस्याओं के लिए है लाभकारी

Mon, 05 Sep 2022 12:24 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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sirshasana - फोटो : istock
योगासनों के अभ्यास की आदत संपूर्ण शरीर को स्वस्थ और फिट बनाए  रखने में सहायक है। अध्ययनों में इसके शारीरिक और मानसिक कई प्रकार के स्वास्थ्य लाभ देखे गए हैं। यही कारण है कि विशेषज्ञ सभी लोगों को दिनचर्या में कम से कम 20 मिनट का समय योगासनों के लिए जरूर निकालने की सलाह देते हैं। योग के अभ्यास से शरीर के लगभग सभी अंगों का कार्य बेहतर तरीके से चलता रहता है, कई गंभीर और क्रोनिक बीमारियों में भी योग के अभ्यास को विशेषज्ञ काफी लाभकारी मानते हैं। योग विशेषज्ञ कुछ आसनों को शरीर के लिए बेहद फायदेमंद मानते हैं, शीर्षासन का अभ्यास उन्हीं में से एक है।

शीर्षासन को  'किंग्स ऑफ ऑल योग' के रूप में भी जाना जाता है। इसके अभ्यास की आदत बनाना शरीर में रक्त परिसंचरण को सुधारने और सिर से लेकर पैरों तक के संपूर्ण अभ्यास के लिए फायदेमंद हो सकता है। तनाव-चिंता जैसी मानसिक स्वास्थ्य की समस्याओं को दूर करने के साथ पेट के अंगों को स्वस्थ रखने और कंधों की मजबूती देने में भी इस अभ्यास के लाभ देखे गए हैं। आइए जानते हैं कि इसका अभ्यास कैसे किया जाता है और इसके क्या लाभ हो सकते हैं?
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शीर्षासन योग करने का तरीका - फोटो : istock
शीर्षासन योग कैसे किया जाता है?

शीर्षासन योग का अभ्यास थोड़ा कठिन है इसलिए इसमें विशेष सावधानी की आवश्यकता होती है। शीर्षासन योग का अभ्यास किसी विशेषज्ञ की निगरानी में किया जाना चाहिए। इसमें होने वाली जरा सी भी चूक के कारण चोट लगने का जोखिम हो सकता है।

इस योग को करने के लिए शांत मुद्रा में बैठ जाएं और आगे की ओर झुककर दोनों हाथों की कोहनियों को जमीन पर टिका दें। अब शरीर का बैलेंस बनाते हुए सिर के सहार उल्टे खड़े होने की कोशिश करें। कुछ समय तक इसी अवस्था में रहे और फिर वापस शुरुआती स्थित में आएं। इसमें शरीर के संतुलन को ठीक रखने पर विशेष ध्यान दिए जाने की आवश्यकता होती है। 
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रक्त संचरण को बढ़ाने वाले योगासन - फोटो : Pixabay
शीर्षासन योग से क्या लाभ होते हैं?

शीर्षासन योग शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए कई प्रकार से लाभकारी हो सकता है। 
  • तनाव को कम करने और एकाग्रता बढ़ाने में इसके लाभ हैं।
  • यह आंखों में रक्त के प्रवाह में सुधार करता है, जिससे रोशनी बेहतर बनी रहती है।
  • बाहों, कंधों और कोर की मांसपेशियों को ताकत देता है।
  • सिर और खोपड़ी में रक्त परिसंचरण में सुधार करता है।
  • पाचन में सुधार करने वाला योगाभ्यास है।
  • पैरों, टखनों और घुटनों में द्रव निर्माण को कम करता है, जिससे गठिया की समस्या का जोखिम कम होता है। 
  • यह अंतःस्रावी ग्रंथियों, मुख्यरूप से पिट्यूटरी और पीनियल ग्रंथियों के लिए काफी फायदेमंद अभ्यास है।
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शीर्षासन योग की सावधानियां - फोटो : iStock
शीर्षासन योग के दौरान सावधानियां

गर्दन में चोट या  सिरदर्द होने पर इस आसन को करने से बचना चाहिए। मासिक धर्म, हाई बी.पी, हृदय की समस्याओं, मस्तिष्क की चोट, ग्लूकोमा, हर्निया जैसी समस्याओं में भी इस योग को न करने की सलाह दी जाती है। इस योगासन के लिए विशेष एकाग्रता और सतर्कता की जरूरत होती है, ऐसे में किसी विशेषज्ञ की निगरानी में ही इस योग का अभ्यास किया जाना चाहिए। 



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नोट: यह लेख योग विशेषज्ञों के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। आसन की सही स्थिति के बारे में जानने के लिए किसी योगगुरु से संपर्क कर सकते हैं।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
 
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