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Yoga Tips: गड़बड़ लाइफस्टाइल के कारण बढ़ रही है ऑस्टियोआर्थराइटिस की दिक्कत, इन आसनों से पा सकते हैं लाभ

Thu, 08 Sep 2022 12:55 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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ऑस्टियोआर्थराइटिस की तेजी से बढ़ रही है दिक्कत - फोटो : istock
लोगों में बढ़ती शारीरिक निष्क्रियता और लाइफस्टाइल से संबंधित अन्य कई तरह की गड़बड़ आदतों ने जोड़ों में दर्द की समस्या को काफी बढ़ा दिया है। युवाओं में भी बढ़ती इस तरह की समस्या जीवन की गुणवत्ता को बिगाड़ सकती है। ऑस्टियोआर्थराइटिस, ऐसे ही घुटनों में होने वाले दर्द की समस्या है जो दुनिया भर में लाखों लोगों को प्रभावित करती है। हड्डियों के सिरों को सहायता देना वाली सुरक्षात्मक कार्टिलेज के खराब होने के कारण यह दिक्कत हो सकती है।

ऑस्टियोआर्थराइटिस किसी भी जोड़ को नुकसान पहुंचा सकती है, यह विकार आपके हाथों, घुटनों, कूल्हों और रीढ़ में जोड़ों को सबसे अधिक प्रभावित करता है। इस स्थिति में लोगों के लिए सामान्यरूप से चलना-उठना और दैनिका कामकाज तक कठिन हो जाता है।

जोड़ों में दर्द की इस तरह की समस्याओं के कम करने में योगासनों के अभ्यास से मदद ली जा सकती है। योग की मदद से शरीर के लचीलेपन को बढ़ाने और हड्डियों-मांसपेशियों की जटिलताओं को कम करने में मदद मिल सकती है। यदि आपको भी ऑस्टियोआर्थराइटिस की समस्या है या फिर इस तरह की दिक्कतों से बचे रहना चाहते हैं तो नियमित रूप से दिनचर्या में योगासनों को जरूर शामिल करें। ऑस्टियोआर्थराइटिस के दर्द के प्रबंधन और इसे बढ़ने से रोकने में मदद करने में कुछ अभ्यास विशेष रूप से कारगर हो सकते हैं।
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वीरभद्रासन से घुटनों को लाभ - फोटो : Istock
वीरभद्रासन योग का करिए अभ्यास

वीरभद्रासन योग, क्रोनिक ऑस्टियोआर्थराइटिस की समस्या में भी आपके लिए काफी सहायक अभ्यास माना जाता है। बाहों, पीठ के निचले हिस्से, घुटनों और पैरों को मजबूत तथा टोन करने में इस योग के लाभ हैं। यह उन लोगों के लिए बेहद फायदेमंद है जो डेस्क पर काम करते हैं या शारीरिक रूप से कम सक्रिय रह पाते हैं। वीरभद्रासन योग का अभ्यास करके आर्थराइटिस की समस्या से बचा जा सकता है। यह अभ्यास शारीरिक सहनशक्ति और संतुलन में सुधार करने में भी आपके लिए विशेष लाभकारी है।
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गठिया में समस्या में लाभकारी योगासन - फोटो : istock
वृक्षासन योग से पा सकते हैं लाभ

वृक्षासन योग के अभ्यास की आदत मांसपेशियों और जोड़ों के दर्द को ठीक करने में आपके लिए सहायक है। यह योगासन रक्त परिसंचरण को बढ़ाने, शारीरिक संतुलन में सुधार करने, शरीर के निचले हिस्से को मजबूत करने, एकाग्रता और फोकस बढ़ाने में आपके लिए काफी सहायक है। योग विशेषज्ञ बताते हैं, वृक्षासन योग का अभ्यास करने वाले लोगों में गठिया जैसी समस्याओं के विकसित होने का जोखिम अन्य लोगों से कम होता है। नियमित रूप से इस योगासन को करने से पैरों को भी मजबूती मिलती है। 
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ब्रिज पोज योग से होने वाले लाभ - फोटो : Pixabay
सेतुबंधासन योग से पा सकते हैं लाभ

सेतुबंधासन योग जिसे ब्रिज पोज के तौर पर जाना जाता है, यह योग मुद्रा रक्त परिसंचरण में सुधार करने के साथ गर्दन, रीढ़, छाती और कूल्हों को फैलाने में मदद करती है। पीठ और कमर के दर्द को ठीक करने के लिए लंबे समय से इस योग के अभ्यास से लाभ प्राप्त किया जाता रहा है। ऑस्टियोआर्थराइटिस जैसी दर्द की समस्या से राहत दिलाने और जीवन की गुणवत्ता को सुधारने में इस योग से विशेष रूप से लाभ प्राप्त किया जा सकता है। ऑस्टियोआर्थराइटिस वाले लोग आसानी से सेतुबंधासन योग को करके लाभ पा सकते हैं।


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नोट: यह लेख योग विशेषज्ञों के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। आसन की सही स्थिति के बारे में जानने के लिए किसी योगगुरु से संपर्क कर सकते हैं।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
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