योगासनों के अभ्यास की आदत कई प्रकार से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हो सकती है। योग का अभ्यास फेफड़ों को खोलने और शरीर में ऑक्सीजन के संचार को बढ़ाने में आपके लिए मददगार माना जाता है। योग विशेषज्ञों ने पाया कि अस्थमा जैसी क्रोनिक स्वास्थ्य समस्याओं के खतरे को कम करने में भी योगासनों से लाभ मिल सकता है। अस्थमा श्वसन तंत्र की सूजन संबंधी बीमारी है, अध्यययनों में पाया गया है कि कुछ प्रकार के योगासनों के अभ्यास से इसके लक्षणों को कम करने और सांस में सुधार करने में विशेष प्रकार से लाभ मिल सकता है।
अस्थमा के रोगियों को सांस लेने में तकलीफ, घरघराहट और खांसी दिक्कत अक्सर बनी रहती है। इसके कारण उनके लिए जीवन के सामान्य कामकाज करना भी कठिन भी कठिन हो जाता है। वैसे तो अस्थमा की समस्या को पूरी तरह से ठीक नहीं किया जा सकता है पर इसके लक्षणों को कम करने में योगासनों की आदत जरूर कारगर हो सकती है।
अस्थमा सहित सांस के अन्य विकारों के लक्षणों को कम करने और फेफड़ों को स्वस्थ रखने के लिए भी योग को दिनचर्या में शामिल करना एक प्रभावी तरीका हो सकता है। आइए जानते हैं कि सांस की समस्याओं में किन योगासनों को शामिल किया जा सकता है?