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Yoga Tips: सांस के रोगियों को योगासनों से मिल सकता है लाभ, अस्थमा की समस्या में कीजिए इन योगासनों का अभ्यास

Sat, 15 Oct 2022 02:56 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सांस की समस्या को कैसे ठीक करें? - फोटो : istock
योगासनों के अभ्यास की आदत कई प्रकार से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हो सकती है। योग का अभ्यास फेफड़ों को खोलने और शरीर में ऑक्सीजन के संचार को बढ़ाने में आपके लिए मददगार माना जाता है। योग विशेषज्ञों ने पाया कि अस्थमा जैसी क्रोनिक स्वास्थ्य समस्याओं के खतरे को कम करने में भी योगासनों से लाभ मिल सकता है। अस्थमा श्वसन तंत्र की सूजन संबंधी बीमारी है, अध्यययनों में पाया गया है कि कुछ प्रकार के योगासनों के अभ्यास से इसके लक्षणों को कम करने और सांस में सुधार करने में विशेष प्रकार से लाभ मिल सकता है।

अस्थमा के रोगियों को सांस लेने में तकलीफ, घरघराहट और खांसी दिक्कत अक्सर बनी रहती है। इसके कारण उनके लिए जीवन के सामान्य कामकाज करना भी कठिन भी कठिन हो जाता है। वैसे तो अस्थमा की समस्या को पूरी तरह से ठीक नहीं किया जा सकता है पर इसके लक्षणों को कम करने में योगासनों की आदत जरूर कारगर हो सकती है।

अस्थमा सहित सांस के अन्य विकारों के लक्षणों को कम करने और फेफड़ों को स्वस्थ रखने के लिए भी योग को दिनचर्या में शामिल करना एक प्रभावी तरीका हो सकता है। आइए जानते हैं कि सांस की समस्याओं में किन योगासनों को शामिल किया जा सकता है?
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ब्रिज पोज से सांस की समस्याओं में लाभ - फोटो : Pixabay
सेतुबंधासन योग के लाभ

सेतुबंधासन योग फेफड़ों की समस्या में काफी कारगर योगाभ्यास है। घरघराहट जैसी सांस की समस्याओं में ब्रिज पोज़ के अभ्यास से लाभ मिल सकता है। यह फेफड़ों को खोलने और संकुचित वायुमार्ग को ठीक करने में आपके लिए विशेष लाभकारी अभ्यास हो सकता है। सेतुबंधासन योग के नियमित अभ्यास की आदत बनाकर फेफड़ों की क्षमता में सुधार करने और सांस की समस्याओं को कम करने में आपको लाभ मिल सकता है।
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बटरफ्लाई योग से शरीर को होने वाले लाभ - फोटो : istock
बद्धकोणासन का अभ्यास

बद्धकोणासन या बटरफ्लाई योग शरीर को आराम देने वाला आसन है। यह आपके शरीर को स्ट्रेच करने के साथ रक्त संचार को बढ़ाने और अस्थमा जैसी सांस की दिक्कतों से राहत देने में मदद करता है। इस योग का अभ्यास काफी आसान है और सभी उम्र के लोग इससे लाभ प्राप्त कर सकते हैं। पीठ के निचले हिस्से, कूल्हे और जांघों के भीतरी हिस्से में तनाव और जकड़न को दूर करने में भी इस योग के अभ्यास से लाभ प्राप्त किया जा सकता है। 
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अनुलोम विलोम प्राणायाम - फोटो : Istock
अनुलोम-विलोम के अभ्यास से लाभ

अनुलोम-विलोम योग एक विशिष्ट प्रकार का प्राणायाम है जो श्वास को नियंत्रित रखने में सहायक है। सांस में सुधार करने की यह विधि फेफड़ों को मजबूती देने और शरीर में ऑक्सीजन के संचार को बढ़ावा देने में काफी लाभकारी हो सकती है। अनुलोम-विलोम प्राणायाम के अभ्यास की आदत मानसिक स्वास्थ्य, ध्यान केंद्रित करने और नकारात्मक विचारों को दूर करने में भी आपके लिए विशेष लाभकारी हो सकता है।



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नोट: यह लेख योग विशेषज्ञों के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। आसन की सही स्थिति के बारे में जानने के लिए किसी योगगुरु से संपर्क कर सकते हैं।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
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