देश में इन दिनों एक वायरस ने आतंक मचा रखा है। इससे अब तक 10 लोग मर चुके हैं तो जानिए ये कैसे फैलता है और बचने के लिए क्या करें।
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nipah virus
दक्षिणी भारत में निपाह वायरस के केस और उनसे हुई मौतों पर देश भर में अलर्ट जारी हो गया है। मंगलवार को इसकी चेतावनी के तहत पीजीआईएमएस रोहतक में भी अलर्ट जारी कर दिया गया है। डॉक्टरों को हिदायत दी गई है कि जो भी बुखार से संबंधित मरीज उपचार के लिए संस्थान में आएगा, पहले उसकी ट्रेवल हिस्ट्री ली जाएगी।
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पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के पल्मोनरी क्रिटिकल केयर मेडिसिन यूनिट के विभागाध्यक्ष डॉ. ध्रुव चौधरी ने अमर उजाला से विशेष बातचीत में बताया कि इस वायरस से ग्रस्त मरीजों को उच्च स्तर के आइसोलेशन की जरूरत होती है। यह सामान्य बुखार के रूप में आता है और यह सांस छोड़ने और खांसी के माध्यम से फैलता है। इसलिए सभी के लिए जरूरी है कि वह भीड़भाड़ वाले एरिया में न जाएं।
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फिलहाल देश में इस वायरस का असर साउथ-ईस्ट एशिया में अधिक है। सीनियर प्रोफेसर ने दावा करते हुए कहा कि केरल में चिकित्सा सेवाएं काफी बेहतर हैं, इसलिए उन्होंने प्राइमरी स्टेज पर ही इसके वायरस को पहचान लिया। संभव है कि इस वायरस को वहीं से फैलने से रोक दिया जाए। इसके अलावा पीजीआईएमएस में भी मेडिकल व नॉन मेडिकल स्टाफ को इस समस्या से निपटने के लिए तैयार रहने को कह दिया गया है।
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क्या है निपाह वायरस
निपाह एक जूनोसिस वायरस है। यह चमगादड़ के जरिए फल व सब्जी में जाता है और इनका प्रयोग करने से यह इंसानों में आ जाता है। यह सीधा जानवरों के माध्यम से भी इंसानों में प्रवेश करता है। इसकी सबसे बड़ी समस्या है कि यदि इसके मरीज को उच्च स्तर के आइसोलेशन में न रखा जाए तो एक से दूसरे व्यक्ति को इसका शिकार होने में अधिक समय नहीं लगता। यह अधिकांश उन लोगों को अपना शिकार बनता है जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। यह वायरस देश में पहली बार जनवरी 2001 में पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में आया था। यह अप्रैल 2007 में बंगाल के नादिया तक पहुंच गया था। वहीं एक्सपर्ट की मानें तो इस वायरस का कोई स्थायी समाधान तो नहीं है, लेकिन रिबावैरिन गोली का प्रयोग कर सकते हैं।
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बीमारी के लक्षण
सांस लेने में समस्या, तेज बुखार, दिमाग में गर्मी, आलस आना, भ्रमित होना, सर्दी-जुखाम, बदन दर्द, सिर दर्द, उल्टी आना, पेद दर्द, खांसी आना, अचानक सांस फूलना, चक्कर आना, झटके आना, बेहोशी आना, कोमा में जाना
फेफड़े व तंत्रिका तंत्र पर अटैक
निपाह वायरस नया उभरता हुआ संक्रमण है। यह वायरस सीधे फेफड़े व तंत्रिका तंत्र पर अटैक करता है। अधिकतर मरीजों की मौत फेफड़े की कार्यक्षमता पर प्रभाव पड़ने से होती है। इस वायरस की चपेट में आने के बाद बहुत से मरीजों को इलाज के दौरान आईसीयू व वेंटीलेटर की जरूरत पड़ती है।
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वायरस बन सकता है मुख्य समस्या
निपाह वायरस को लेकर डॉक्टरों में भय है कि इसका उपचार आसान नहीं है। इस वायरस का असर 5 से 14 दिन का होता है। इससे ग्रस्त रोगियों की मृत्यु दर 9 से 68 फीसदी है। देश में यदि यह फैलता है तो यह मृत्यु दर बढ़ सकती है। क्योंकि देश के अस्पतालों में उच्च स्तर की आइसोलेशन सुविधा तो दूर सामान्य भी नहीं होती। बात यदि पीजीआईएमएस की करें तो यहां भी यह सुविधा महज बयानों में है। स्वाइन फ्लू जैसी बीमारी का उपचार करने में यहां के स्टाफ व डॉक्टर तक ग्रस्त हो जाते हैं। आइसोलेशन के नाम पर यहां सामान्य कमरे हैं, इनकी हवा को बाहर फिल्टर कर फेंकने का कोई यंत्र यहां नहीं लगा है।
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इन बातों का रखें ध्यान
खजूर व नारियल का इस्तेमाल सावधानी पूर्वक करें। कटे फल के सेवन से बचना चाहिए। खाने की वस्तुएं चमगादड़ से संक्रमित न हों, नारियल से बनने वाली चीजों से परहेज करें, हाथ अच्छे से धोएं और बीमार मरीज से दूर रहें, बीमार मरीज के बिस्तर व बर्तन, कपड़े अलग रखें, बीमारी से मृत व्यक्ति के शव को छूने में सावधानी रखें।
निपाह वायरस की जानकारी आ गई है, लेकिन विभाग की ओर से अभी कोई निर्देश नहीं मिले हैं। हमने जिला अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्रों को इस समस्या से निपटने के लिए अलर्ट रहने को कह दिया है। - डॉ. अनुपमा मित्तल, जिला मलेरिया अधिकारी