Yoga
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वीरभद्रासन के प्रकार
वीरभद्रासन में पांच तरह के आसन होते हैं। पहला वीरभद्रासन 1, इसमें सामने का टखना मोड़कर कूल्हे को ऊपर की ओर उठाना होता है।
दूसरा वीरभद्रासन 2, इसमें आगे का टखना या घुटना मोड़कर कूल्हे को बगल की ओर मोड़ते हुए भुजाएं समानांतर रखनी होती हैं।
तीसरा वीरभद्रासन 3, इस योग मुद्रा में एक पैर पर संतुलन बनाते हुए सीधा खड़े होकर हाथों को आगे की ओर रखते हुए दूसरे पैर को ऊपर उठाया जाता है।
बद्ध वीरभद्रासन, इसमें वीरभद्रासन 2 की तरह पैर करते हुए धड़ आगे की ओर झुका और भुजाएं पीछे होनी चाहिए।
विपरीत वीरभद्रासन, इसमें भी पैर की स्थिति वीरभद्रासन 2 की तरह और हाथ व धड़ पीछे सीधे पैर की तरफ पहुंचाएं।