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Lifestyle: कैसा खाना शरीर को पहुंचा सकता है नुकसान? ये जानना है बेहद जरूरी

Fri, 14 Jul 2023 01:34 PM IST
श्रुति गौड़ लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

किचन आपके हाथ में है तो वही पकता है, जो आपको पसंद है लेकिन कभी आपने सोचा है, फिट रहने के लिए आपके शरीर को किस तरह का भोजन चाहिए?
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food new - फोटो : istock
सोनम लववंशी

Lifestyle
: स्वाद पसंद है तो सेहत की चिंता किए बगैर आप खाती रहती हैं। किचन आपके हाथ में है तो वही पकता है, जो आपको पसंद है लेकिन कभी आपने सोचा है, फिट रहने के लिए आपके शरीर को किस तरह का भोजन चाहिए? स्वाद इस दौर में पसंद नहीं किया गया, लेकिन इसका मतलब यह कभी नहीं रहा कि आपकी सेहत प्रभावित होती हो तो हो जाए।

स्वाद के साथ हमेशा ही सेहत की जुगलबंदी रही और तभी घर के बने व्यंजन, अचार, मसाले- सब कुछ फिटनेस के लिए ‘हेल्थ कैप्सूल’ का काम करते रहे लेकिन बीते कुछ सालों से जुबान पर स्वाद का रंग कुछ ऐसा चढ़ा है कि लोग, खासकर महिलाएं अपनी सेहत की कीमत पर भी उसको तरजीह दे रही हैं। हालात यह हैं कि फास्ट फूड किशोर उम्र में ही लड़के-लड़कियों को मोटापा दे रहा है, तो कहीं महिलाएं सोशल स्टेटस के चक्कर में डिब्बा-बंद चीजों का इस्तेमाल कर रही हैं।
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food - फोटो : सोशल मीडिया
इसमें दो राय नहीं कि स्वाद ही किसी भोजन को खाने के लिए मजबूर करता है, लेकिन यह भी सच है कि जब रसोई आपके हाथों में है तो आप खुद ही पौष्टिक भोजन को स्वादिष्ट बना सकती हैं। हां, इसके लिए आपको सोशल स्टेटस के मिथ से बाहर निकलना होगा, लेकिन इससे आपके बढ़ते बच्चे को भी अपनी फिटनेस के लिए आर्टिफिशियल सप्लीमेंट्स की जरूरत नहीं पड़ेगी। आखिर आपको ही यह समझना होगा कि सही फिटनेस के लिए आपके शरीर को, बच्चे के शरीर को और पूरे परिवार को किस तरह के भोजन की जरूरत है।
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Fitness - फोटो : Istock
ध्यान देने की बात है कि बीते कुछ सालों में युवाओं का फिटनेस के प्रति लगाव बढ़ा है। यह सही भी है और गलत भी। सही इसलिए कि सेहत के लिए यह जरूरी है और गलत इसलिए कि कुछ युवा अपने जीने के आधुनिक अंदाज का दिखावा करने लगे हैं। जल्द से जल्द खुद को फिट दिखाने और बॉडी बनाने के लिए ब्रांडेड प्रोटीन, पाउडर और कैप्सूल ले रहे हैं, जबकि जानकार कहते हैं कि इनसे बचना बेहद जरूरी है। ये सेहत पर बुरा असर डालते हैं।

बेहतर है कि नेचुरल प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट लें और ज्यादा फैट वाली सामग्री से बच कर रहें। सेहत के जानकार पौष्टिक भोजन, दाल, सब्जियां और फल आदि खाने की सलाह देते हैं।

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बर्गर - फोटो : Social media
सैकड़ों सालों की सभ्यता और संस्कृति के इस दौर में भोजन का महत्व सिर्फ हमारे शरीर को पोषण देने भर का नहीं रहा है, बल्कि यह ‘जन्म-भोज’ से लेकर श्राद्ध तक हमारे जीवन से जुड़ा है। इतना ही नहीं, खाना बनाने के पारंपरिक तरीकों के पीछे भी सालों का ज्ञान-विज्ञान छुपा हुआ है। क्षेत्र के मौसम और संस्कृति के अनुकूल खान-पान के तरीकों के पीछे हमारे पूर्वजों का सदियों का ज्ञान और गहन अध्ययन रहा है लेकिन आधुनिकता के इस दौर में खाने का स्वरूप पूरी तरह बदल गया है।

पाश्चात्य संस्कृति का असर हमारे खाने के साथ-साथ हमारी दिनचर्या में भी देखने को मिलता है। लाइफस्टाइल के नाम पर हम अपनी सेहत से खिलवाड़ करने को उतावले हैं। इसका परिणाम भी गंभीर बीमारियों के रूप में सामने आने लगा है। हार्ट अटैक, ब्लड प्रेशर और शुगर जैसी बीमारियां आम हो चली हैं।
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Peanut Butter - फोटो : istock
विश्व के सबसे युवा देश में आज युवक-युवतियां गंभीर बीमारियों की मार से परेशान है। हाईटेक जीवन-शैली ने उनके लिए सब कुछ बदल कर रख दिया है। अब महिलाओं के लिए भी सबसे जरूरी हो गया है नया फैशन और नया शौक! साधारण जीवन जीना तो मानो अब की पीढ़ी भूल ही गई है। लड़कियों और महिलाओं के लिए भी घर के स्वस्थ खाने से कहीं ज्यादा जरूरी अब नया स्वाद हो गया है। सालों तक जिन मसालों की दुनिया दीवानी रही, आज वही मसाले वाला खाना ‘टू मच स्पाइसी’ हो गया है। मूंगफली और घी अब पीनट बटर हो गया है। डिब्बा-बंद चीजें सोशल स्टेटस बन गई हैं।
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food - फोटो : सोशल मीडिया
शरीर को फिट रखने के लिए सही और पौष्टिक भोजन मिलना जरूरी है, क्योंकि सही खान-पान से ही फिट रहा जा सकता है और इसी से वेट मैनेजमेंट भी होगा, साथ ही वर्कआउट करने पर कैलोरी बर्न हो सकेगी। जहां तक पौष्टिक आहार की बात है तो गेहूं, जौ और राई में ग्लूटेन अनसैचुरेटेड प्रोटीन के रूप में मौजूद होता है। यही ग्लूटेन भूख बढ़ाता है।

अमेरिका में हुए एक अध्ययन का निष्कर्ष है कि एंटीऑक्सीडेंट रिच या ग्लूटेन-फ्री का लेवल लगा डाइट सोडा किसी भी दृष्टि से सेहत के लिए फायदेमंद नहीं है। इसमें नेचुरल फ्रुक्टोज और सुक्रोज की तुलना में 100 प्रतिशत ज्यादा मीठापन होता है। जो लोग यह सोचकर डाइट सोडा लेते हैं कि वह सेहतमंद है, तो वे जान लें कि यह फेक शुगर शरीर को इंसुलिन के अधिक उत्पादन के लिए उकसाता है।
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orange juice new - फोटो : istock
खान-पान को पौष्टिक बनाए रखना है तो अपने नियमित भोजन में कम तेल-मसालों से बने खाने को ही प्राथमिकता दी जाना चाहिए। लेकिन आजकल तो डाइट फूड का बड़ा कारोबार खड़ा हो गया है। प्रोसेस्ड और डिब्बा-बंद खाने से बाजार भरा पड़ा है। इस तरह का खाना शरीर के साथ सेहत के लिए भी हानिकारक है। शरीर को सबसे ज्यादा नुकसान फ्राइड फूड पहुंचाते हैं। इनके खाने से अत्यधिक फैट शरीर में जाता है। एक अमेरिकी विश्वविद्यालय के अध्ययन से पता चलता है कि भोजन को अत्यधिक तापमान पर देर तक तलने से कैंसर का जोखिम बना रहता है। इससे सेहत संबंधी दूसरी समस्याएं खड़ी हो सकती हैं।

शुगर सिरप और शुगर मेपल जैसी सामग्री शरीर के सिस्टम को नुकसान पहुंचाती हैं। आजकल प्रोसेस्ड जूस पीने का शगल है, जबकि इसमें मौजूद शुगर सिरप मोटापे की सबसे बड़ी वजह होता है। फिट रहने के लिए सबसे जरूरी है कि अल्कोहल का सेवन न किया जाए। इसकी ज्यादा मात्रा दिल, फेफड़े और किडनी की समस्या खड़ी करती है। डाइयूरेटिक अल्कोहल के सेवन से यूरिन अधिक पास होती है, जिससे डिहाइड्रेशन की स्थिति बनती है। इसके ज्यादा मात्रा में सेवन से चेहरे पर सूजन भी आ सकती है।

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diet - फोटो : istock
अब बात अगर डाइट कंट्रोल करके फिट होने के तरीके की करें तो डाइट को सही माना जाए या नहीं? यह मौजूदा दौर में एक बड़ा सवाल है, क्योंकि शरीर को वह सब चाहिए, जो उसकी जरूरत है। हम तोल-मोल कर बोल तो सकते हैं, मगर खा नहीं सकते! बशर्ते हमको कोई बीमारी न हो! डाइटिंग करके दुबला तो हुआ जा सकता है, मगर यह फिट होने का तरीका कतई नहीं हो सकता। वजह, जब इस तरीके से शरीर दुबला होगा तो कमजोर भी होगा और वह कमजोरी कई बीमारियों को जन्म दे सकती है।

शरीर की जरूरत से कम खाने और पौष्टिक आहार न लेने की आदत कमजोरी ही बढ़ाती है। इसलिए बेहतर है कि फिटनेस के लिए शरीर की जरूरतों का ध्यान रखें और डाइटिंग के गुलाम न बनें, क्योंकि हमारे आस-पास ऐसे कई उदाहरण मिल जाएंगे, जिन्हें डाइटिंग एवं जिम ने फिट कम और बीमार ज्यादा किया।

इस बारे में फिटनेस विशेषज्ञों का भी कहना है कि वर्कआउट के साथ उसी के हिसाब से खान-पान भी जरूरी है, मगर जो खाया जाए, वह नेचुरल हो, न कि आकर्षक शीशियों में भरे सप्लीमेंट हों। इन दिनों वर्कआउट का क्रेज महिलाओं में भी बहुत बढ़-चढ़कर देखा जा रहा है। जहां पुरुष मांसपेशियों को मजबूत बनाने के लिए जिम जाते हैं, वहीं महिलाओं की प्राथमिकता अनावश्यक फैट को बर्न करना और फिट रहना होती है।

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gym - फोटो : Getty Images
देखा गया है कि कोई भी सर्टिफाइड फिटनेस ट्रेनर हमेशा पोषक आहार की सिफारिश करता है। जो युवक-युवतियां जिम जाते हैं, उन्हें अपने नियमित भोजन को कई भागों में बांट कर खाने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा खाने के साथ पानी पीना भी उतना ही जरूरी है।

फिटनेस को लेकर अत्यधिक जागरूक युवक-युवतियां यह भूल जाते हैं कि हमारे पूर्वज और बुजुर्ग कभी किसी जिम में नहीं जाते थे और न कोई सप्लीमेंट डाइट लेते थे। वे जमकर मेहनत करते थे और उसी के अनुसार उनका खान-पान भी होता था। लेकिन अब ज्यादातर महिलाएं फिटनेस के लिए डाइट कंट्रोल की कोशिश में रहती हैं, जिसे सही नहीं कहा जा सकता।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
वैसे, मौजूदा दौर में कसरत के तरीके भी बदल गए हैं। परंपरागत अखाड़ों का वक्त तो 60 के दशक से ही चला गया था, उसके बाद सामने आई कसरत की सामग्री को भी युवाओं ने रिजेक्ट कर दिया। अब लोग घर में दंड-बैठक लगाने या पार्क, मैदान में कसरत करने अथवा दौड़ लगाने को अपने स्टेटस के मुताबिक नहीं मानते।

महिलाओं को भी लगता है कि घर या पार्क में व्यायाम करने से उनका सामाजिक स्तर प्रभावित होगा। यही कारण है कि उन्हें फिटनेस के लिए जिम जाना ज्यादा बेहतर, आसान और अपने स्टेटस के हिसाब से सही लगता है लेकिन फैशन से शुरू हुआ यह शगल अब कई मायनों में आदत में बदल रहा है, हालांकि सभी युवक-युवतियों के साथ ऐसा नहीं है। इसके बावजूद अधिकांश लोग, खासकर महिलाएं परंपरागत खान-पान के साथ फिट रहने के उन तरीकों को अब भूलती जा रही हैं।
 
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