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Vasant Panchami 2020: अध्यात्म की राह भी दिखाता है वसंत

Fri, 24 Jan 2020 12:42 PM IST
नवनीत राठौर लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
वसंत पर्व जहां एक ओर आशा, उत्साह एवं उमंग से परिपूर्ण जीवन की ओर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है, वहीं दूसरी ओर शिक्षा और बुद्धि के समुचित नियोजन का आशावादी वातावरण भी बनाता है। ऋतुराज वसंत के आते ही प्रकृति का रूप निखर उठता है। पतझड़ की विदाई शुरू होती है और धरती पर शस्य श्यामला होने लगती है। कुछ ही दिनों में माहौल बदल-सा जाता है और धरती हरे-भरे पेड़-पौधों, उन पर छाई नई-नई कोपलों और फूलों से मनोरम हो उठती है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
सरसों के फूलों की वसंती चादर ओढ़कर नैसर्गिक शृंगार से सज-धज जाती है। बयार में यह रूप नवगति, नवलय, तालछंद नव से समन्वित हो जाता है। मनुष्य ही नहीं कुदरत का कोना-कोना पुलकित हो उठता है। यह आनंद वसंत के रूप में प्रकट होता है। काव्य-ग्रंथों और शास्त्रों, पुराणों में वसंत का सजीव वर्णन मिलता है। कवियों ने लौकिक और आध्यात्मिक चित्त से ऋतुराज के लिए समृद्ध मन से गीत गाए हैं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
भविष्य पुराण के अनुसार, वसंत माघ की शुक्ल त्रयोदशी में उल्लास के देवता काम और सौंदर्य की देवी रति की मूर्ति बनाकर सामूहिक रूप से पूजन किया जाता है। इन मूर्तियों को सिंदूर से सजाया जाता है। इस पुराण में वसंत का चैत्रोत्सव के रूप में वर्णन किया गया है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
संस्कृत ग्रंथों में वसंत पर्व के समय मदन उत्सव एवं सुवसंतक नामक दो खास उत्सवों का वर्णन मिलता है। उदकश्वेडिका, सहकार मनिका, पुष्पवायिका, अम्सूरष-वादिका, नवपत्रिका आदि उत्सव भी इन दिनों मनाए जाने के उल्लेख हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, वसंत प्रकृति और मानव के संवेदनशील संबंधों का साकार रूप है। साहित्य की हर विधा में वसंत का वर्णन मिलता है। अश्वघोष, कालिदास, माघ और भारवि जैसे प्रख्यात संस्कृत कवियों का शृंगार है वसंत।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
वसंत को कवि ने सहजता से स्वीकार किया और अभिव्यक्ति दी है। इसे पुष्प समय, पुष्पमास, ऋतुराज, पिकानंद, कामसखा, फलु, मधुमाधव के नामों से भी चित्रित किया है। वसंत की इसी अपूर्व महत्ता के कारण गीतकारों ने ऋतुओं में श्रेष्ठ वसंत को माना है।
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