ऋग्वेद में उत्तराखंड को देवभूमि बताया गया है। इस पावन भूमि को मनीषीयों की पूर्ण कर्म भूमि कहा गया है। क्या आप जानते हैं कि मर्यादापुरुषोत्तम भगवान राम के छोटे भाई भगवान लक्ष्मण जी का भी उत्तराखंड से नाता रहा है। लक्ष्मण जी ने अपनी आखिरी तपस्या देवभूमी उत्तराखंड में ही की थी।
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लक्ष्मण जी ने अपनी आखिरी तपस्या उत्तराखंड के गढ़वाल में की थी। मान्यता है कि लक्ष्मण जी ने अपनी आखिरी तपस्या तपोवन में की थी जो कि टिहरी गढ़वाल में है। अगर आप कभी उत्तरकाशी गए होंगे तो आपने तपोवन के बारे में जरूर सुना होगा। पर्यटक बड़ी तादाद में यहां ट्रैकिंग के लिए जाते हैं।
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- फोटो : pixa
तपोवन गंगोत्री हिमनद से 6 किलोमीटर की दूरी पर है। यहां के अद्भुत नजारे पर्यटकों का दिल जीत लेते हैं। तपोवन से दूर-दूर तक फैली हिमालय की चोटियां दिखती हैं। तपोवन को ही नंदनवन भी कहते हैं। यहां पर्वतारोहण के लिए कैंपिंग की जाती है।
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- फोटो : pixa
गोमुख ट्रैकिंग के पास ही तपोवन है जहां हर साल लाखों की तादाद में विदेशी पर्यटक ट्रैकिंग के लिए उमड़ते हैं। नंदनवन से शिवलिंग, भागीरथी, केदार डोम, थलय सागर और सुदर्शन जैसे चोटियों का शानदार दृश्य दिखता है।
पर्यटक यहां सतोपंत, खर्चाकुंड, कालिंदी कल, मेरू और केदारडोम पर ट्रैकिंग और कैपिंग करते हैं। ट्रैकिंग के अलावा पर्यटक पर्वतों पर चढ़ाई और रॉक क्लाइम्बिंग भी करते हैं। यहां के हरियाली से भरे चीड़ और देवदार के वृक्ष पर्यटकों को काफी लुभाते हैं।