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क्या आप जानते हैं सिंगौरगढ़ किले के बारे में ये अनोखी बातें, यहां का रहस्य आज भी है अनसुलझा

Fri, 12 Mar 2021 04:25 PM IST
प्रकाश चंद जोशी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
भारत में कई ऐसी जगह हैं, जहां का इतिहास जान हर कोई हैरान रह जाता है। इन जगहों पर लोगों को कई रहस्यमय बातें पता चलती हैं, जिन्हें जानने के लिए यहां लोग पहुंचते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया में अब भी कई ऐसी जगह मौजूद हैं, जहां का रहस्य आज भी अबूझ पहेली बने हुए हैं और इन्ही में से एक है सिंगौरगढ़ का किला। जितना पुराना इस किले का इतिहास है, उतनी ही ये जगह आज भी एक रहस्य भरी बनी हुई है। तो चलिए आपको इस सिंगौरगढ़ किले के बारे में खास बातें बताते हैं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : istock
दरअसल, मध्य प्रदेश के दमोह जिले में सिंगौरगढ़ का ये किला स्थित है और ये गढ़ साम्राज्य का पहाड़ी किला है। इस किले को रानी दुर्गावती का विवाह स्थल भी कहा जाता है। साल 1564 में जब रानी दुर्गावती का शासन काल था, तब मुगलों से युद्ध में इस किले की काफी अहम भूमिका रही। किले को इतनी मजबूती से बनाया गया है कि यहां कि सुरक्षा को भेद पाना मुगल शासकों के बस की बात नहीं थी। इसके पीछे दो वजह ये थी कि पहली इस किले के सामने पहाड़ सुरक्षा की दीवार बनकर खड़ा था, और दूसरा तहखानों से निकली खुरंग का अंतिम छोर रानी और उनकी सैनिक टुकड़ियों के अलावा किसी को नहीं पता था।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : istock
सिंगौरगढ़ जलाशय की प्राकृतिक सौंदर्यता भी देखते ही बनती है। इस सैकड़ों साल पुराने जलाशय में कभी पानी खत्म नहीं हुआ। इसको लेकर मान्यताएं हैं कि ये तालाब अपने अंदर कई अनेकों रहस्य समेटे हुए है। बताया जाता है कि इस तालाब के अंदर एक बावली बनी है, जहां पर स्वर्ण मुद्राओं का खजाना छिपे होने की बातें कही जाती हैं। यहां पानी कभी खत्म न होने की वजह से इस जलाशय के अंदर जाने के लाखों प्रयास असफल रहे और अब ये बावली भू गर्व में चली गई है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : istock
कहा जाता है कि जिस किसी ने भी धन के लालच में यहां खुदाई करने की कोशिश की है, उसके साथ गलत हुआ है और कई लोग तो पागल तक हो गए हैं। यहां के स्थानीय बुजुर्ग लोग मानते हैं कि सिंगौरगढ़ जलाशय में रानी दुर्गावती के शासनकाल की स्वर्ण मुद्राएं समेत रानी का पारस पत्थर भी इस जलाशय के अंदर डाल दिया गया था।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : istock
स्थानीय लोग मानते हैं कि गौंड राजाओं के राजकाज के समय तहखाने गुप्त सुरंग मार्ग सिंगौरगढ़ से सीधे मदन महल जबलपुर निकलता है। हालांकि, इन्हें पुरातत्व विभाग ने बंद कर दिया है, लेकिन अब भी इनके अवशेष यहां मौजूद हैं। यही नहीं, सैनिक टुकड़ियों के लिए किले की सुरक्षा के लिए 32 किलोमीटर दीवार यानी रास्ता आज भी सिंगौरगढ़ के किले से पर्वत श्रृंखलाओं तक पूरी तरह सुरक्षित बना हुआ है।
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