कोरोना के कारण लंबा समय हो गया जब लोग अपने घरों से बाहर निकले ही नहीं है। साल के अंत तक युवा तो फिर भी एक बार को यात्राएं करने लगे हैं लेकिन बुजुर्ग घरों में रह-रहकर चिढ़चिढ़े हो चुके हैं। ऐसे में आवश्यकता है कि उनका हवा पानी बदला जाए, उन्हें पूरी सुरक्षा के साथ किसी नदी तट, मंदिर, आध्यात्मिक शांति वाले स्थान पर ले जाया जाए या फिर क्यों न उन्हें उनके गांव ही ले जाया जाए। हालांकि बुजुर्गों को यात्रा कराना इतना आसान नहीं होता है इसलिए बहुत जरूरी है कि आप अपने दादा-दादी, नाना- नानी या अन्य बड़ों को अपने साथ ले जा रहे हैं तो अगली स्लाइड्स में बताई गई बातों का विशेषकर ख्याल रखें नहीं तो संभव है कि आप रास्तेभर परेशान हो सकते हैं।