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Subhash Chandra Bose Jayanti: नेताजी ने ही गांधीजी को पुकारा था 'राष्ट्रपिता', फिर इस कारण बढ़ी दूरी

Thu, 23 Jan 2020 08:09 AM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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- फोटो : social media
"तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा" देश में अंग्रेजी शासन के दौरान एक ऐसा नारा, जिसने हजारों युवाओं को आजादी की लड़ाई में बलिदान के लिए प्रेरित किया। ये नारा दिया था नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने। आज उनकी जयंती है। आजाद हिंद फौज के संस्थापक सुभाष चंद्र बोस किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। इस अवसर पर हम आपको बता रहे हैं, उनके जीवन से जुड़े कुछ अहम किस्से: 

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नेताजी सुभाष चंद्र बोस
सुभाष चंद्र बोस का जन्म उड़ीसा राज्य के कटक शहर में 23 जनवरी, 1897 को हुआ था। वकील पिता जानकीनाथ बोस और मां प्रभावती के बेटे सुभाष चंद्र बोस बचपन से पढ़ाई में अच्छे थे। कटक से प्राथमिक शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने आगे की पढ़ाई कलकत्ता यूनिवर्सिटी से की और विश्वविद्यालय में दूसरा स्थान हासिल किया।
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- फोटो : social media
उनके पिता आईसएएस बनाना चाहते थे पर बोस को अंग्रेजों की गुलामी में काम करना नामंजूर था। उनका मन देशभक्ति में रमा हुआ था। साल 1921 में बोस पहली बार महात्मा गांधी से मिले और नेताजी ने ही सबसे पहले गांधी जी को राष्ट्रपिता कहकर पुकारा था।

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नेताजी सुभाष चंद्र बोस
साल 1921 में गांधी जी से मुलाकात के बाद ही सुभाष चंद्र बोस आजादी की लड़ाई का हिस्सा बने। उनके देशप्रेम को देखते हुए गांधी जी ने उन्हें देशभक्तों का देशभक्त कहा था। हालांकि, भगत सिंह की फांसी के बाद उन दोनों में कुछ दूरियां आ गईं। बोस चाहते थे कि फांसी रुकवाने के लिए गांधीजी कुछ पहल करें। 
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Netaji Subhash Chandra Bose(Film Scene)
बाढ़ में की थी समाजसेवा
सुभाष चंद्र बोस का सामाजिक कार्यों में भी खूब लगाव था। साल 1922 में बंगाल में आई भयंकर बाढ़ से घिरे लोगों की उन्होंने बहुत मदद की थी। उन्होंने युवक दल की भी स्थापना की थी। 
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- फोटो : social media
सुभाष चंद्र बोस द्वारा गठित आजाद हिंद फौज एक आजाद हिंद रेडियो का इस्तेमाल करती थी, जो लोगों को स्वतंत्रता संग्राम में शामिल होने के लिए प्रेरित करती थी। बोस ने एक महिला बटालियन भी गठित किया था, जिसमें उन्होंने रानी झांसी रेजिमेंट का गठन किया था। लक्ष्मी सहगल उसकी कैप्टन बनीं थी। मालूम हो कि इस पर आधारित एक वेब सीरीज भी आ रही है। 
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