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Navratri 2023: यूपी में स्थित हैं देवी के ये शक्तिपीठ, इस नवरात्रि के मौके पर करें दर्शन

Fri, 20 Oct 2023 09:20 AM IST
अभिलाष श्रीवास्तव लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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navratri 2023 - फोटो : Istock
शारदीय नवरात्रि का पर्व 15 अक्तूबर, रविवार से शुरू हो चुका है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ रूपों की आराधना करने से इसका विशेष लाभ मिलता है। नवरात्रि में मां के दर्शन का भी विशेष महत्व है तो क्यों न इस बार मां के शक्तिपीठों की यात्रा की प्लानिंग कर ली जाए? अगर आप उत्तर प्रदेश में रहते हैं तो यहां मां के पांच शक्तिपीठ हैं, जिनके दर्शन की योजना इस बार के नवरात्रि में बना सकते हैं।

धर्मशास्त्र के अनुसार वैसे तो देवी के 51 शक्तिपीठ हैं लेकिन कुछ ग्रंथों में 52 शक्तिपीठों का उल्लेख मिलता है। राजा दक्ष की यज्ञ सभा में माता सती बिना पिता के निमंत्रण के पहुंच गई थीं। राजा दक्ष ने माता सती के सामने उनके पति का खूब अपमान किया। क्रोध में मां ने अग्नि कुंड में कूदकर प्राण त्याग दिए। इसके बाद क्रोधित भगवान शिव वहां पहुंचे और सती का शव लेकर शिव तांडव करने लगे। ब्रह्मांड पर प्रलय आने लगी, जिस पर विष्णु भगवान ने इसे रोकने के लिए सुदर्शन चक्र से माता सती के शरीर के टुकड़े कर दिए। माता के शरीर के अंग और आभूषण 52 टुकड़ों में धरती पर अलग अलग जगहों पर गिरे, जिन्हें शक्तिपीठ के रूप जाना जाता है।

आइए जानते हैं उत्तर प्रदेश में कौन से शक्तिपीठ हैं जिनके दर्शन किए जा सकते हैं।
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देवी पाटन मंदिर, बलरामपुर - फोटो : istock
देवी पाटन मंदिर

बलरामपुर जिले में माता का एक शक्तिपीठ है जिसकी काफी मान्यताएं हैं- इसे देवी पाटन शक्तिपीठ के रूप में जाना जाता है। मान्यताओं के अनुसार यहां पर मां सती का बायां स्कंध गिरा था। इस शक्तिपीठ में मां मातेश्वरी के रूप में विराजमान हैं। नवरात्रि के दिनों में यहां काफी भीड़ होती है। आप तुलसीपुर रेलवे स्टेशन से यहां आसानी से पहुंच सकते हैं। 
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रामगिरी शक्तिपीठ - फोटो : istock
रामगिरी शक्तिपीठ

उत्तर प्रदेश के चित्रकूट में स्थित रामगिरी शक्तिपीठ भी काफी प्रसिद्ध है। यहां माता सती का दायां स्तन गिरा था। इस स्थान पर माता शिवानी के रूप में विराजनीय हैं। रामगिरि पर्वत पर स्थित है, आप 'चित्रकूटधाम कर्वी' रेलवे स्टेशन से यहां आसानी से पहुंच सकते हैं। पर्यटन की दृष्टि से ये अति महत्त्वपूर्ण स्थल रहा है, जहां हर साल लाखों की संख्या में श्रृद्धालु दर्शन के लिए आते हैं।

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विंध्याचल धाम - फोटो : Twitter
विंध्याचल शक्तिपीठ

विंध्याचल शक्तिपीठ में मां विंध्यवासिनी के रूप में विराजित हैं, ये मिर्जापुर जिल में स्थित है। पौराणिक मान्यताएं कहती है कि शक्तिपीठ वह स्थान है जहां सती के अंग गिरे थे लेकिन विंध्याचल में शरीर का कोई अंग नहीं गिरा था। यहां देवी सशरीर वास करती हैं, माना जाता है कि उन्होंने यह स्थान अपने रहने के लिए चुना था। मंदिर के पास में तीन देवियों के मंदिर हैं जिनके दर्शन करके आप पुण्यार्जित कर सकते हैं।
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मणिकर्णिका घाट - फोटो : Pixabay
मणिकर्णिका घाट

उत्तर प्रदेश के वाराणसी में स्थित ये शक्तिपीठ काफी अलौकिक और मान्यताओं वाली है, यहां माता सती की मणिकर्णिका गिरी थी। यहां माता के विशालाक्षी और मणिकर्णी स्वरूप की पूजा होती है। मणिकर्णिका घाट को मु्क्तिधाम माना जाता है, जहां पर अंतिम संस्कार होनेसे स्वर्ग की प्राप्ति होती है। वाराणसी रेलवे स्टेशन के थोड़ी दूरी पर स्थित इस मंदिर के दर्शन किए जा सकते हैं।
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ललिता देवी शक्तिपीठ - फोटो : istock
माता ललिता देवी शक्तिपीठ

वाराणसी के बाद अगले शक्तिपीठ के दर्शन के लिए आप प्रयागराज जा सकते हैं, यहां ललिता देवी शक्तिपीठ है जहां पर माता सती के हाथ की अंगुली गिरी थी। यहां माता ललिता के नाम से जानी जाती हैं। नवरात्रि के दिनों में माता के दर्शन के लिए यहां बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ इकट्ठा होती है। 
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