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हिमालय की पहाड़ी पर बनी है ऐसी झील जिसे लोग कहते हैं 'स्वर्ग का रास्ता'

Mon, 23 Sep 2019 10:19 AM IST
अपराजिता शुक्ला लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
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- फोटो : pixa
भारत में बहुत से दर्शनीय स्थल हैं जिनकी यात्रा के दौरान एक अलग ही अनुभूति  होती है। इन जगहों की यात्रा चाहे यहां के अद्भुत नजारों की वजह से किया जाए, लेकिन इनका धार्मिक महत्व भी बहुत अधिक है। ऐसी ही एक सुंदर और अद्भुत झील बनी है हिमालय के पहाड़ों में जिसका आकार त्रिभुज के समान है। तो आइए जानें इस खूबसूरत जगह के बारे में जिसके प्रति लोगों में गहरी आस्था है।

 
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- फोटो : pixa
सतोपंथ झील, उत्तराखंड
उत्तराखंड के हिमालय के पर्वतीय क्षेत्रों में पर बनी है यह सतोपंथ झील। इस झील तक पहुंचने के लिए बहुत से दुर्गम रास्तों की ट्रैकिंग करना पड़ती है। लेकिन रास्तों के मनोरम दृश्य के साथ ही झील तक पहुंचने के बाद अद्भुत दृश्यों को देखकर आप रास्ते की थकान और कठिनाइयों को भूल जाएंगे। स्थानीय लोगों के अनुसार इस झील का बहुत अधिक धार्मिक महत्व है और ज्यादातर सैलानी इसके प्रति गहरी आस्था के कारण ही यहां आते हैं।

 
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- फोटो : pixa
सतोपंथ की पौराणिक मान्यता
सतोपंथ झील के आकार के बारे में भी लोगों में मान्यता प्रचलित है। क्योंकि आमतौर पर झील का आकार गोल या चौकोर होता है लेकिन यह झील तिकोने आकार की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस स्थान पर त्रिलोक के स्वामी अर्थात ब्रह्मा, विष्णु और महेश ने इस झील के तीनों कोनों पर  खड़े होकर स्नान किया था। इसलिए सतोपंथ झील का आकार तिकोना है।

 

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- फोटो : pixa
और भी हैं पौराणिक मान्यताएं
इस झील के प्रति बहुत सी धार्मिक मान्यताएं है जिसमें से जो सबसे ज्यादा प्रचलित है वो है कि यहां से महाभारत काल के दौरान पांडव भाई इस रास्ते से स्वर्ग की ओर गए थे, इसलिए इस झील का नाम सतोपंथ पड़ा और इसे धरती पर स्वर्ग जाने का रास्ता भी कहा जाता है।

 
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- फोटो : pixa
सतोपंथ झील की ट्रैकिंग
सतोपंथ झील केवल एक धार्मिक स्थल ही नहीं है बल्कि यहां पर बहुत से सैलानी ट्रैकिंग के उद्देश्य से भी आते हैं। क्योंकि यहां का ट्रैकिंग क्षेत्र अत्यंत कठिन है और यहां पर बहुत से बीहड़ रास्तों और पथरीले ढलानों से होकर गुजरना पड़ता है। इस स्थल की सुंदरता के कारण केवल भारत ही नहीं बल्कि विदेश से भी पर्वतारोही आते हैं ट्रैकिंग के लिए।

 
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- फोटो : pixa
कैसे पहुंचे सतोपंथ झील 
यह झील बद्रीनाथ से 22 किमी दूर है और जोशीमठ से इसकी दूरी 70 किमी है। यहां की ट्रैकिंग के लिए इनर लाइन परमिट की जरूरत पड़ेगी क्योंकि यह स्थान भारत और तिब्बत की सीमा के पास पड़ता है। 
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