तरकुलहा मंदिर
गोरखपुर स्थित तरकुलहा मंदिर का इतिहास भारत के स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ा हुआ है। ऐसा कहा जाता है कि भारत के पहले स्वतंत्रता संग्राम में बंधू सिंह नाम के क्रांतिकारी ने अंग्रेजों के नाक में दम कर दिया था। बंधू सिंह गुरिल्ला लड़ाई में माहिर थे। इसलिए जब भी कोई अंग्रेज मंदिर के पास से गुजरता तो बंधू सिंह उसका सिर काटकर देवी मां के चरणों में समर्पित कर देते थे। यह देश का इकलौता मंदिर है, जहां प्रसाद के रूप में मटन दिया जाता है।